समाचार दीर्घा

जारी है हिन्दी आन्दोलन, जुटे हैं हज़ारों हिन्दीप्रेमी

‘हिन्दी ग्राम’ का लक्ष्य हिन्दी में उपलब्ध हो नौकरी-व्यापार

इंदौर। विश्व की कोई भी भाषा जैसे अंग्रेज़ी, जापानी, चाइनीज़, फ्रेंच आदि जब तक बाज़ार से नहीं जुड़ी, तब तक उसका विकास सीमित ही रहा है। उसी तरह संस्कृत भी बाज़ार से दूर रही तो उसे विलुप्तता की कगार पर खड़ा कर दिया। यही हाल हिन्दी का भी हो रहा, परन्तु हिन्दी को बाज़ार से जोड़ने और असीमित कामकाज के अवसर लोगों तक पहुँचाने के लिए हिन्दी ग्राम सक्रिय है।
हिन्दीग्राम की स्थापना वर्ष 2017 में इंदौर, मध्यप्रदेश निवासी डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ द्वारा की गई। हिन्दी में उपलब्ध नौकरी, कामकाज, व्यापार के मंचों को एक स्थान पर लाकर लोगों तक पहुँचाने का दायित्व लेते हुए नए अवसर पैदा करने व उपलब्ध अवसरों को हिन्दी जनों तक पहुँचाने के उद्देश्य से ‘हिन्दीग्राम’ की स्थापना की और आज हज़ारों लोगों तक हिन्दीग्राम पहुँच भी रहा है। डॉ. अर्पण जैन का कहना है कि ‘जब तक हिन्दी को बाज़ार नहीं अपनाता, लोगों का आकर्षण हिन्दी के प्रति कम रहेगा, जबकि भारत विश्व का सबसे बड़ा बाज़ार है।’

हिन्दीग्राम भी मातृभाषा उन्नयन संस्थान का अनुषांगिक प्रकल्प है। इसमें शिखा जैन, भावना शर्मा भी जुड़े हैं। संस्थान द्वारा देशभर में हिन्दी के प्रचार के लिए हस्ताक्षर बदलो अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों को हिन्दी में हस्ताक्षर करने की प्रेरणा देकर शपथ दिलवाई जाती है। वेबसाइट, गोष्ठी, आदि माध्यम से हिन्दी में नौकरी, कामकाज, व्यापार के अवसरों की जानकारीयाँ साझा होंगी और विद्यार्थियों, नौकरी खोजने वाले लोगों तक हिन्दीग्राम पहुँच कर उन्हें अवसर उपलब्ध करवाएगा।
वर्तमान में हिन्दीग्राम द्वारा डॉ. वेदप्रताप वैदिक स्मृति प्रतियोगिताएँ भी करवाई जा रही हैं। इसके साथ ही हिन्दीग्राम विद्यालयों, महाविद्यालयों में जागरुकता व हिन्दी विस्तार के लिए देशभर में अभियान संचालित कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *