हिन्दी ग्राम के कार्य

हिन्दी ग्राम

हिन्दी ग्राम शब्द में ही सम्पूर्ण परिकल्पना समाहित है, एक ग्राम जो राष्ट्र की सबसे छोटी इकाई होकर भी समग्र को समाहित कर संचालित होता है, उसी उद्देश्य को हिन्दी ग्राम में सहेजा जा रहा है। हिन्दी ग्राम का मूल उद्देश्य हिन्दी भाषा को रोज़गार मूलक व व्यवसाय से जोड़ना है, क्योंकि विश्व की कोई भी भाषा जैसे अंग्रेज़ी, जापानी, चाईनीज़, फ्रेंच आदि जब तक बाज़ार से नहीं जुड़ी तब तक उसका विकास सीमित ही रहा है । उसी तरह संस्कृत बाज़ार से दूर रही तो उसे विलुप्त होने की कगार पर ला पहुँचाया, यही हाल हिन्दी का भी हो रहा है। परन्तु हिन्दी को बाज़ारमूलक बनाने और उसमें रोज़गार के अवसर लाने के उद्देश्य से हिन्दी ग्राम की शुरुआत की गई है।
मूलत: हिन्दी ग्राम के माध्यम से राष्ट्रीयस्तर पर हिन्दीभाषियों के लिए रोज़गार के अवसरों को तलाशकर जानकारी उपलब्ध करवाना, हिन्दी का प्रचार करना, हिन्दी में शिक्षा ग्रहण करने के लिए लोगों को प्रेरित करना, हिन्दी शिक्षण से रोज़गारोन्मुखी कार्यक्रम संचालित करना, भारत के पर्यटन से राजस्व प्राप्त करने वाले राज्यों में हिन्दी का प्रसार कर वहाँ हिन्दी भाषी पर्यटकों की सहायता करना तथा राज्यों में पर्यटको का रुझान बढ़ाना और राज्यों की राजस्व वृद्धि करना, भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु हिन्दी का विस्तार करना और देशभर में हिन्दी से लोगों को जोड़ने के लिए हिन्दी में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित करना है।

हिन्दी की गरिमा का समेकित स्वर मातृभाषा उन्नयन संस्थान

भारत में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने और जनभाषा के रूप में सर्व स्वीकार्यता लाने के उद्देश्य से 10 जनवरी 2018 को मातृभाषा उन्नयन संस्थान का पंजीयन मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इन्दौर से हुआ। एक अन्तरताने (वेबसाइट) से शुरू हुई यात्रा ने लोगों को अपनी भाषा, अपनी हिन्दी में हस्ताक्षर करने का संकल्प दिलवाना आरम्भ किया।  इस संस्थान का प्रथम उद्देश्य हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाना है। 

2+

2 विश्व कीर्तिमान

35 लाख

हस्ताक्षर बदलवाने पर एक विश्व कीर्तिमान बना

10000

से अधिक पुस्तकालयों की स्थापना

500+

वृहद आयोजनों की शॄंखला

संस्थान की पहल
घर-घर पुस्तकालय अभियान

समाज में पुस्तक संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा 20 मई 2025 से ‘घर-घर पुस्तकालय अभियान’ आरम्भ किया गया। इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य परिवारों, विशेषकर बच्चों और युवाओं को पुस्तकों से जोड़ना तथा प्रत्येक घर में एक छोटा-सा पुस्तकालय स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है। 'घर-घर पुस्तकालय अभियान' की राष्ट्रीय संयोजक भावना शर्मा हैं, जो वर्तमान में मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय सचिव भी हैं। अभियान के कारण मातृभाषा उन्नयन संस्थान के नाम एक विश्व कीर्तिमान दर्ज हुआ है। विश्व में पहली बार किसी संस्था द्वारा 10,000 से अधिक निजी पुस्तकालय घरों में स्थापित करवाने का कार्य किया गया है।

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