मातृभाषा उन्नयन संस्थान
मातृभाषा उन्नयन संस्थान
हिन्दी की गरिमा का समेकित स्वर मातृभाषा उन्नयन संस्थान
भारत में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने और जनभाषा के रूप में सर्व स्वीकार्यता लाने के उद्देश्य से 10 जनवरी 2018 को मातृभाषा उन्नयन संस्थान का पंजीयन मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इन्दौर से हुआ। वैसे तो इस संस्थान की शुरुआत वर्ष 2016 में महज़ एक वेबसाइट मातृभाषा.कॉम से हुई, जिसका तब केवल एक उद्देश्य था कि हिन्दी के नवोदित व स्थापित रचनाकारों को मंच उपलब्ध करवाना, जहाँ उनका लेखन नि:शुल्क प्रकाशित हो और पाठकों की पहुँच में आए। माँ अहिल्या की नगरी व मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इन्दौर से युवा पत्रकार एवं सॉफ़्टवेयर इंजीनियर डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने मातृभाषा उन्नयन संस्थान की नींव रखी, जो हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प लेकर हिन्दी भाषा के प्रचार के सशक्त आंदोलन के रूप में सामने आया। एक अन्तरताने (वेबसाइट) से शुरू हुई यात्रा ने लोगों को अपनी भाषा, अपनी हिन्दी में हस्ताक्षर करने का संकल्प दिलवाना आरम्भ किया। इस आंदोलन के संरक्षक डॉ. वेदप्रताप वैदिक जी, अहद प्रकाश जी, चौथा सप्तक में शामिल कवि राजकुमार कुंभज जी हैं। इस संस्थान का प्रथम उद्देश्य हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाना है। साथ ही, हिन्दी को रोज़गारमूलक भाषा बनाना है, हिन्दी में रोज़गार के अवसर उपलब्ध करवाना, भारतीय भाषाओं के सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखना, जनता को जनता की भाषा में न्याय मिले, साहित्य शुचिता का निर्वहन सम्मिलित है।
स्पष्ट लक्ष्य और सुनियोजित कार्यशैली के चलते महज़ कुछ वर्ष में ही संस्थान देश के लगभग बीस से अधिक राज्यों में अपनी इकाई बना चुका है, और जिससे अब तक लगभग 35 लाख से अधिक लोग जुड़ गए हैं, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु समर्थन दिया व अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करना आरंभ कर दिए हैं। आज मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने पुस्तक प्रकाशित करने के लिए प्रकल्प संस्मय प्रकाशन तैयार किया। समाचारों के लिए ख़बर हलचल न्यूज़, मासिक साहित्य ग्राम व मातृभाषा डॉट कॉम बनाया। साथ ही, साहित्यकारों की जानकारियों को एकजुट करने के उद्देश्य से साहित्यकार कोश बनाया है। साहित्यकार कोश में भी देश के विभिन्न प्रान्तों के लगभग दस हज़ार से अधिक साहित्यकारों की जानकारी सम्मिलित की जा चुकी है। मातृभाषा.कॉम पर लिखने वालों की संख्या पाँच हज़ार से अधिक व 25 लाख पाठकों का वृहद् परिवार है। संस्थान द्वारा ‘हर मंदिर बने ज्ञानमन्दिर’, ‘हर ग्राम-हिन्दीग्राम’, ‘आदर्श हिन्दीग्राम’, ‘पुस्तकालय अभियान’ आदि कई अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिसके माध्यम से सतत् हिन्दी सेवा का अभिनव कार्य जारी है।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के द्वारा कवि सम्मलेन, संवाद कार्यक्रम, जन संपर्क इत्यादि कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों को हिन्दी भाषा से जोड़कर भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्ती भूमिका निभाई जा रही है। वैसे तो देश में कई संस्थाएँ सक्रियता से हिन्दी सेवा में जुटी हैं, किन्तु उन सभी संस्थाओं के गुलदस्ते में मातृभाषा उन्नयन संस्थान व हिन्दीग्राम की विशिष्ट पहचान है। हिन्दी का स्वाभिमान स्थापित करने के लिए संस्थान द्वारा कर्मठ हिन्दी-योद्धाओं को तैयार किया जा रहा है, जो विभिन्न भू-भाग पर हिन्दी प्रचार का कार्य कर रहे हैं व हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु समर्थन प्राप्त कर रहे हैं। आज हिन्दी को जनभाषा या राष्ट्रभाषा बनाने के लिए सम्पूर्ण देश का साथ आना आवश्यक है, इसलिए संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ द्वारा जनसमर्थन अभियान भी संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत वे साहित्यिक, राजनैतिक, सामाजिक हस्तियों, सांसद, विधायकों आदि से भेंट कर, उनके माध्यम से जनजागृति व हिन्दी समर्थन के स्वर मुखर कर रहे हैं।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान भारत में हिन्दी की स्थिति मज़बूत करने हेतु अहिन्दीभाषी क्षेत्रों में व अन्य भारतीय भाषाओं का हिन्दी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए हिन्दी को रोज़गार मूलक भाषा बनाने की दिशा में कार्य करता है। यह भारत में अनिवार्य शिक्षा में हिन्दी को शामिल करने का पुरज़ोर समर्थन करता है।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान का एकमात्र उद्देश्य यही है कि ‘हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा’ बनाया जाए। इसके लिए संस्थान द्वारा पूरे समर्पण के साथ प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सहित विदेशों के भी हिन्दी के हर नवोदित रचनाकार को लेखन का मंच दिया जा रहा है, ताकि विश्व पटल पर हिन्दी चमके। इसी के साथ, मातृभाषा उन्नयन संस्थान का नाम वैश्विक फ़लक पर दर्ज हो गया। इस अभियान का असर यह हुआ कि पहले जो लोग बैंक से लेकर अन्य सरकारी कामकाज में अंग्रेज़ी में हस्ताक्षर करते थे, वे न सिर्फ़ हिन्दी में हस्ताक्षर करने लगे हैं बल्कि संस्थान के अभियान का समर्थन करने के साथ प्रधानमंत्री से हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का आग्रह भी कर चुके हैं। संस्थान की इकाईयों में मातृभाषा.कॉम, संस्मय प्रकाशन, साहित्यकार कोश, हिन्दीग्राम, ख़बर हलचल न्यूज़, मासिक साहित्य ग्राम् और सेवा सर्वोपरि शामिल हैं।
देश की संसद में बैठे सैंकड़ों सांसदों का समर्थन प्राप्त कर मातृभाषा उन्नयन संस्थान लगातार हिन्दी का पक्ष मज़बूत करता जा रहा है। हज़ारों हिन्दी प्रेमियों, साहित्यकारों, हिन्दी पत्रकारों और राजनेताओं का समर्थन हासिल कर संस्थान लगातार हिन्दी को प्रचारित-प्रसारित कर रहा है। हिन्दी के मंचीय कवियों को संस्थान से जोड़कर हिन्दी कवि सम्मेलनों के माध्यम से हिन्दी भाषा का प्रचार किया जा रहा है। संस्थान भी इसी तर्ज पर फ़िल्म एवं विज्ञापन उद्योग में दखल रखते हुए हिन्दी के रचनाकारों को रोज़गार के अवसर उपलब्ध करवा रहा है और कवियों को कवि सम्मेलनों के माध्यम से आय सुनिश्चित करवाने की दिशा में कार्यरत है।
संस्थान से लाखों हिन्दी प्रेमी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, ऐसे संस्थानों के कारण आज वैश्विक पटल पर हिन्दी के सम्मान की स्थापना सम्भव हो पा रही है, जो प्रशंसनीय भी है। संस्थान की सफलता में कई वैश्विक संस्थाओं ने अपनी सहभागिता प्रदान करनी शुरू कर दी है, विश्व के कई देशों में स्थित अन्य हिन्दी सेवी संस्थाओं ने मातृभाषा उन्नयन संस्थान से जुड़ना स्वीकार किया और मातृभाषा उन्नयन संस्थान के साथ मिलकर वैश्विक रूप से हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। निकट भविष्य में भी मातृभाषा उन्नयन संस्थान की सक्रियता से हिन्दी भाषा के महत्त्व को वैश्विक रूप से स्थापित किया जा सकता है। अब तक संस्थान के खाते में 2 विश्व कीर्तिमान भी दर्ज हो चुके हैं। 11 लाख हस्ताक्षर बदलवाने पर एक विश्व कीर्तिमान बना और दूसरा ‘घर-घर पुस्तकालय अभियान’ में संस्थान द्वारा 10000 से अधिक पुस्तकालयों को निर्मित करवा कर संस्थान के नाम एक ओर विश्व कीर्तिमान बनाया है। संस्थान वृहद स्तर हिन्दीभाषा का प्रचार-प्रसार करता है, और यही कारण है संस्थान के कार्य वैश्विक स्तर पर नज़र आ रहे हैं। इसीलिए संस्थान द्वारा संचालित हिन्दी आंदोलन भी सबसे सशक्त आंदोलन कहा जाता है।