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हिन्दी योद्धा

रत्नगर्भा भारत की धरा पर सदा से ही माँ, मातृभाषा और मातृभूमि के प्रति व्यक्ति के कर्तव्यबोध का व्याकरण बना हुआ है। हमारे यहाँ का ताना-बाना ही संस्कार और संस्कृति के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वाहन का बना है। हमारे यहाँ धर्मग्रन्थ भी ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ के सिद्धांत का प्रवर्तन करते है। आधुनिक काल में भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने कहा है कि –

‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।

सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।।’

किन्तु वर्तमान में हमारी मातृभाषा जो हिंदुस्तान की राष्ट्रभाषा होना चाहिए वो हिन्दीभाषा दूषित राजनीती की शिकार होती जा रही है। सन १९६७ में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने से रोक कर राजभाषा बना दिया। साथ ही एक विदेशी भाषा अंग्रेजी की दास्ताँ को स्वीकार करते हुए उसे भी राजभाषा बना दिया गया।

फिर मत और आधिपत्य के साथ तुष्टिकरण की राजनीती ने अनुसूचियों के माध्यम से छल करके लगातार हिन्दी को अलग-थलग करके उसको तोड़ा भी जा रहा है और फिर हिन्दी के सम्पूर्ण स्वाभिमान पर कुठाराघात किया जा रहा है। हिन्दी भाषा पर आए इस संकट की घडी में  भारतीयता के नाते भारत के स्वाभिमानी स्वयंसेवक योद्धाओं की आवश्यकता है। भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी को पुनर्स्थापित करने के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान निरन्तर प्रयासरत है। डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ के साथ आज संस्थान के प्रत्येक सारथी भारतेन्दु हरीशचंद और महात्मा गाँधी के सपनों को पूर्ण करने के लिए इस भारत की पावन भूमि पर कार्य करती है। हिन्दी के स्वाभिमान की स्थापना के आन्दोलन से देश के अंतिम व्यक्ति तक ले जाने और उन्हें जोड़ कर हिन्दी के प्रति निष्ठावान बनाने के संकल्प को पूर्ण करने के लिए जो भी भाई-बहन इस सेवा के लिए रोज 1 से 2 घंटा समय दे सकते हैं तथा इस कार्य को नौकरी या व्यवसाय के रूप में नही, बल्कि राष्ट्र सेवा, मातृभाषा सेवा, मातृभूमि सेवा समझकर सेवा भाव से करना चाहते हैं। हम ऐसे कर्मठ, पुरुषार्थी व संस्कारी, भाई-बहनों को ‘हिन्दी योद्धा’ बनने के लिए आमंत्रित करते है।

हिन्दी योद्धा का कर्तव्य:

  • आज हिन्दी को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने के लिए हमें जुटकर हिन्दी का प्रचार-प्रसार करना होगा,
  • हस्ताक्षर बदलो अभियान को अपने क्षेत्र में संचालित एवं प्रचारित करना होगा,
  • हिन्दी लेखन करने वाले साथियों को आय दिलवाने में मदद करनी होगी,
  • हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए उसे बाजार मूलक भाषा बनानी होगी,
  • हिन्दी साहित्य को आमजन तक पहुँचाना होगा,
  • हिन्दी के प्रचार हेतु अपने क्षेत्र में हिन्दी प्रेमियों का समुच्चय बनाकर प्रतियोगीताएं, कार्यक्रम आदि का संचालन करना होगा।

हिन्दी योद्धा द्वारा किए जाने वाले आवश्यक कार्य:

  • हस्ताक्षर बदलो अभियान संचालित करना।
  • ‘शिक्षालय की ओर चले हिन्दीग्राम’ संचालित करना।
  • हिन्दी प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना।
  • आदर्श हिन्दीग्राम बनाना और गतिविधियां संचालित करना।
  • संगणक योद्धा , संवाद सेतु, हिन्दी समर्थक जनमानस को जोड़ना।
  • जनसमर्थन अभियान को संचालित कर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु समर्थन प्राप्त करना।
  • हिन्दी व्याख्यानमाला, काव्य गोष्ठी, निबंध प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिता, पुस्तक समीक्षा आदि आयोजित करना।
  • हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार करना।
  • प्रत्येक हिन्दी योद्धा द्वारा संचालित समस्त कार्यों का विवरण अनिवार्यतः संस्थान की केंद्रीय मुख्यालय द्वारा प्रदत्त निश्चित प्रारूप में करना अनिवार्य है।

अन्य संगठनात्मक कार्य –

  • ग्राम-प्रखण्ड-तहसील-वार्ड समिति का निर्माण करना
  • आदर्श हिन्दी ग्राम निर्माण में सहयोग करना।
  • भाषाई स्वच्छता अभियान का विद्यालओं में सचालन करना।
  • समाचार संस्थाओं में समाचार के माध्यम से अभियान का प्रचार-प्रसार करना
  • समय-समय पर मुख्यालय द्वारा निर्देशित सेवाओं को पूर्ण प्रामाणिकता से निभाना।

नियमित स्वाध्याय करना 

स्वाध्यायाद्योगमासीत् योगात् स्वाध्यायमामनेत्।

योगस्वाध्याय सम्पत्या परमात्मा प्रकाशते।।

प्रत्येक हिन्दी योद्धा को दिन में एक बार कम से कम 1 घंटा नियमित स्वाध्याय करें। इससे आपके ज्ञान एवं प्रशिक्षण में नवीनता व दिव्यता निरन्तर बढ़ती रहेगी। प्रशिक्षण एवं स्वाध्याय हेतु हिन्दी के महनीय साहित्यकारों की पुस्तके, राजभाषा अधिनियम, अनुसूची, के साथ-साथ संस्थान द्वारा प्रदत्त साहित्य  अनिवार्य रूप से पढ़े। इन पुस्तकों के निरन्तर स्वाध्याय से आपके ज्ञान में अत्यन्त वृद्धि और आचरण में शुचिता पवित्रता व सात्विकता बनी रहगी।

हिन्दी योद्धा का व्यक्तित्व

व्यक्तित्व शब्द अपने आप में बहुत व्यापक अर्थ रखता है जो व्यक्ति के एक-एक कार्य-कलाप व आदत से निर्मित होता है। सामाजिक कार्यकर्त्ता का व्यक्तित्व प्रभावशाली दिव्य और हिन्दी भाषा की समझ रखने वाला और मन-वचन और कर्म से हिन्दी भाषा का समर्थक होना अति आवश्यक  है ताकि उसके व्यक्तित्व से समाज के लोग प्रेरणा लें और सदगुणों को धारण करके उसके जैसा बनने का प्रयास करें। अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के लिए हिन्दी योद्धा निम्न गुणों को धारण करने के लिए दृढ संकल्पित हो-

1-प्रभावशाली सम्बोधन- हिन्दी योद्धा की भाषा-शैली अत्याधिक मृदु होनी चाहिए। यदि आप प्रभावशाली संबोधन करेंगे तो लोगों में आपकी बात को सुनने में रूचि उत्पन्न होगी। किसी भी कार्यकर्त्ता या अन्य व्यक्ति को आदरणीय, श्रद्धामयी माताओं, पिता तुल्य बुजुर्गो, संतों आदि के लिए पूज्य, श्रद्धेय, आदरणीय भाईयो-बहनो आदि प्रयोग करना चाहिए।

2-विषय की सम्पूर्ण व प्रामाणिक जानकारी होना- क्योंकि हिन्दी योद्धा का मुख्य कार्य लोगों को हिन्दी भाषा से जोड़ना और उसके प्रति प्रेम उत्पन्न करके उसे राष्ट्रभाषा बनाने हेतु आंदोलित करना। अतः हिन्दी योद्धा को भाषा अधिनियम, हिन्दी आंदोलनों की जानकारी, साहित्यकारों से परिचय, महनीय हिन्दी सेवकों के बारे में अध्ययन, भाषा की मानकता और वर्तनी दोषों से मुक्ति के साथ ग्रन्थों का सामान्य परन्तु प्रामाणिक ज्ञान होना आवश्यक है। जिससे कि अपना आत्मविश्वास भी बना रहे और लोगों को हिन्दी भाषा का सही महत्व भी समझ में आ सके।

3-वक्ता व श्रोता का आत्मीय भाव सम्पर्क- किसी भी विषय को भावपूर्वक तरीके से रखें। लोगों के जीवन से विषय को सीधा जोड़कर उनके ह्रदय, मस्तिष्क व भावों से एकाकार होकर अपनी बात कहे। इससे श्रोता आत्मीयता का अनुभव करते हैं और आपके आत्मविश्वास में भी अभिवृद्धि होगी।

4-नेतृत्व– सामाजिक कार्यकर्ता में नेतृत्व का गुण होना आवश्यक है। एक हिन्दी योद्धा को जाति, मजहब आदि की श्रेष्ठता के अहंकार से मुक्त होकर समाज के विभिन्न वर्गों, जाति, मजहब, धर्म, सम्प्रदाय, के लोगों को एक साथ लेकर चलना चाहिए। कार्य की सफलता का श्रेय सभी को देते हुए असफलता या विरोधाभासों के बीच खुद आगे आकर समूह का नेतृत्व करने का सामर्थ्य होना चाहिए।

5-अनचाहे शब्दों से बचना- समूह में अपनी बात रखते हुए हमें अनचाहे शब्दों से बचने का प्रयास करना चाहिये। क्योंकि अनचाहे शब्दों को बार-बार दोहराने से समूह में आपके प्रति गंभीरता कम होती है। जैसे-कहने का मतलब, समझ गये न, जो है न , वाह, अरे, अबे, यार, ओके, अभद्र मजाक न करें आदि।

हिन्दी योद्धा बनने हेतु अनिवार्य अर्हताएँ

  • शिक्षा- कक्षा १० से अधिक पढ़ाई किए हुए हिन्दी प्रेमी
  • संगणक (कम्प्यूटर) पर कार्य करने का अनुभव।
  • सोशल मीडिया पर कार्य करना आता हो।
  • आयु – १८ वर्ष से अधिक

आवश्यक सत्यापित प्रमाणपत्रः- संस्थान से जुड़ने पर हिन्दी योद्धा को अपना आधारकार्ड या मतदान परिचय पत्र की छायाप्रति जमा करानी होगी उसके साथ पासपोर्ट साइज फोटो और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की फोटो कॉपी हिन्दी योद्धा प्रकल्प में जमा करनी होगी।

 

एक प्रकाशन रचनाकार के शब्दरंगों से सपनों का बुनकर होता है। एक रचनाकार जो अब तक अपने सृजन को डायरी के पन्नों तक समेट देता था, अब उसके सार्थक सृजन को गुणवत्ता की चाशनी में डूबा कर, रंग और आकार के साथ पाठक की उन्नत और वैचारिक मानसिक खुराक बनाने का कार्य करने वाले उपक्रम का नाम प्रकाशक है।

भाषा के सौंदर्य में अभिवृद्धि और लेखकों के मनोभावों के बीजों के अंकुरण हेतु प्रकाशन ही तो बनता है जनमानस की समिधा, इसीलिए वैचारिक क्रांति के संवाहक के रूप में प्रकाशक को अधिक जिम्मेदार माना जाता है। जिम्मेदार प्रकाशन ही पाठक और लेखक के बीच का वह सेतु है जो शिक्षित समाज के निर्माण और जागरूक मानस प्रस्फुटन करता है।

इसी कड़ी में हिन्दी भाषा के उन्नयन और भारतीय भाषाओँ के बीच सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से माँ अहिल्या की नगरी और मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से ‘संस्मय प्रकाशन’का उदय वर्ष २०१९ में हुआ है। जहाँ प्रकाशन को सम्मान बाँटने और पुस्तक छापने का व्यापार न बनाकर पाठकों को वैचारिक खुराक पहुँचाने और श्रेष्ठ लेखन को प्रकाशन का पंख देकर रचनाकार को लेखक के रूप में स्थापित करने का ध्येय निहित है।

वर्तमान दौर में हिन्दी लेखकों की या कहें भारतीय भाषा के सृजनकर्ताओं की मूलभूत समस्या पुस्तक विक्रय की है, चूँकि यही कारक भी है कि भारतीय भाषाएँ अभी भी ‘पेट’ यानी रोजगार की भाषाएँ कम बन पाई है, जिससे भारतीय भाषाओँ में लेखन भी प्रभावित है और पाठक समाज भी वैचारिक नवाचार से वंचित।

इन्हीं उद्देश्य की स्थापना हेतु हिन्दी सेविका व उद्यमी श्रीमती शिखा जैन के नेतृत्व में एक अनथक यात्रा का आरम्भ संस्मय प्रकाशन के रूप में हुआ है। यहाँ एक लेखक गुणवत्ता,विश्वसनीय, सकारात्मकता के साथ-साथ उच्च स्तरीय तकनीकी तंत्र, मुद्रण तंत्र और बेहतरीन वितरण और विपणन (मार्केटिंग) तंत्र की सुविधाओं को प्राप्त करेंगे। जिससे लेखकों की आय में अभिवृद्धि के साथ व्यक्तिगत दाहांकन यानी व्यक्तिगत ब्रांडिंग के उच्चस्तरीय पैमानों और प्रयासों का महाकुम्भ भी हासिल होगा।

संस्मय प्रकाशन की सबद्धता ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान से है, जिसका मूल उद्देश्य हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाना और भारतीय भाषाओँ को ‘पेट’ की भाषा बनाना है, इसलिए मूल तत्व की प्राप्ति के लिए यह प्रकाशन प्रतिबद्धता के साथ लेखक को पाठकों से जोड़ता भी है और लेखकों और पाठकों के साथ न्याय करते हुए गुणवत्ता के साथ सामग्री पहुँचाता भी है। संस्मय प्रकाशन जो भाषायी सौंदर्य का विस्तार कर स्थापित और नवांकुर रचनाकारों के सृजन रूपी स्वप्न को बुनकर पाठक परिवार को वैश्विक स्तरीय गुणवत्ता आधारित वैचारिक खुराक उपलब्ध करवाने हेतु वचनबद्ध है।

 

सूचना प्रौद्योगिकी प्रकल्प

मातृभाषा उन्नयन संस्थान में एक महत्वपूर्ण विभाग के रुप मे कार्य करने वाला विभाग है सूचना प्रौद्योगिकी प्रकल्प एवं संगणक विभाग । यह विभाग हिन्दी को देशभर में प्रचारित एवं प्रसारित करने के उद्देश्य से आज के समय में महत्वपूर्ण भूमिका में है। हमें इसे व्यावहारिक स्वरूप को समझना होंगा। आई.टी यानी कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी हिंदी में सूचना प्रौद्योगिकी के नाम से जाना जाता है। सोशल मीडिया सामाजिक संवाद का एक रूप है, वेबसाइट जो विभिन्न कार्य योजनाओं को इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराती है। यानी यदि इन तीनो का समावेश किया जाता तो यह विभाग ढांचागत रूप से सकारात्मक हो जाता है जो कि सम्पूर्ण राष्ट्र में हिंदी भाषा के बारे में प्रचार करेगा, हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु जनमानस का समर्थन प्राप्त करेगा, हिन्दी में हस्ताक्षर बदलने के लिए प्रेरित करेगा, आदि। इस प्रकल्प का मुख्य ध्येय है हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने के लिए समस्त घटकों को इंटरनेट के माध्यम से प्रचारित और प्रसारित करना।  सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सूचनाओं को एकत्रित कर सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप्प, इंस्टाग्राम, ट्विटर, जैसे अन्य ,मंचों पर हिंदी के तथ्य रखना और इसके माध्यम से जन जन तक प्रेषित करा जाना है।

अंकरुपण (डिजिटलाइजेशन) की दुनिया में हिंदी को स्थापित करने के लिए वर्तमान युग की आवश्यकता या कहे संपर्क का सबसे समृद्ध माध्यम सोशल मीडिया होने से संस्थान द्वारा उस मंच पर भी सूचना प्रौद्योगिकी प्रकल्प द्वारा कार्य किया जाएगा।

प्रकल्प का दृष्टिकोण

आज के युग में सोशल मीडिया एक ऐसा साधन है जिसने देशों की सत्ताओ में परिवर्तन ला दिया है और अपनी बात को सही दिशा में परिवर्तन करने के लिए आई.टी सेल एवं सोशल मीडिया तथा महत्वपूर्ण वेबसाइटों का उपयोग किया है। लेकिन ये दो मुँह हथियार भी है जो कि एक तरफ अच्छा है और दूसरी तरफ से खतरनाक भी है इसलिए हिंदी सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का दायित्व होगा केंद्रित सामग्री का सही प्रयोग। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा इस प्रकल्प की स्थापना करके वर्तमान समय की आवश्यकता जो सोशल मीडिया है उस पर हिंदी को प्रचारित और प्रसारित करना है।

प्रकल्प का लक्ष्य

यह प्रकल्प सभी ग्राम , नगर प्रान्त में बनने वाले पदाधिकारियों, हिंदी योद्धाओं, प्रभारियों को संगणक क्रांति के माध्यम से जोड़ेगा, साथ ही हिन्दी के बारे में केंद्रीय अनुसन्धान दल द्वारा जारी घटकों को अंतर्जाल के माध्यम से प्रसारित करेगा, उचित दिशा निर्देश व उचित प्रशिक्षण के साथ हिंदी प्रचार कार्य संपन्न करवाएगा। इस प्रकल्प का लक्ष्य होगा कि हिन्दी के प्रचार और प्रसार सम्बंधित घटक सम्पूर्ण राष्ट्र में पहुंचे, जिससे जनमानस का हिन्दी प्रति प्रेम जागृत हो और वे संस्थान से जुड़ कर हिंदी आंदोलन के सहभागी बनें। इससे पहले हिन्दी प्रचार हेतु परिचर्चा, गोष्टी और आयोजन आदि किए जाते थे, जिसके माध्यम से अधिकतम कुछ हजार लोग ही हिन्दी उत्थान विमर्श में शामिल हुआ करते थे , किन्तु सूचना प्रौद्योगिकी युग में सोशल मीडिया के माध्यम से लाखों करोड़ो लोगों तक हिंदी विमर्श पहुंचाया जा सकता है। भारत मे 30 करोड़ से अधिक लोंगो के पास चलितभाष (स्मार्ट फ़ोन) है जो कि 2019 में और 40 करोड़ से अधिक हो जायेंगे, इन लोगो तक हम अपनी पहुंच बनाकर हिन्दी भाषा को प्रचारित करते हुए संस्थान की हर छोटी-बड़ी गतिविधियों और उपलब्धियों को उन तक पहुंचा कर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का आंदोलन सक्रीय कर सकते है।

 

ट्वीटर, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया के जमाने में लोगों का एक दूसरे के साथ संपर्क बेहद आसान हो गया है। इस वजह से समाज का अलग-अलग तबका और अलग-अलग समूह इन्हीं माध्यमों के जरिए कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। इस पक्ष को जनता के बीच लोकप्रिय होते देखते राजनीतिक दलों और नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दिखानी शुरू की है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमें भी हिन्दी  भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए हिन्दी प्रेमियों का एक समूह जो संगणक ज्ञान ( कम्प्यूटर ) में प्रवीण हो, तैयार करना होगा, जो सहज रूप से जनमानस के भीतर हिन्दी भाषा के महत्व स्थापित करने और हिन्दी भाषा का अन्य भारतीय भाषाओँ के साथ समन्वय स्थापित कर सके। साथ मातृभाषा उन्नयन संस्थान, हिन्दीग्राम आदि के कार्यकलाप को नियमित सोशल मिडिया पर स्थापित करना होगा, जिससे आम जनता का संस्था को हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए मजबूती से समर्थन प्राप्त हो।

संगणक योद्धा के दायित्व:

१. संस्थान के सोशल मीडिया पर उपलब्ध पृष्ठ, खातों की जानकारी, प्रतिदिन की गतिविधियों से जनता को जोड़ना।

२. सोशल मीडिया पर हिन्दी के प्रचार सम्बंधित जानकारियों, गतिविधियों से जनता को जोड़ना।

३. जानकारियों को ज्यादा से ज्यादा फेसबुक, व्हाट्सप्प, लिंकडीन, ट्विटर आदि के समूहों  में साझा करना।

४. हिन्दी प्रचार सम्बंधित आलेखों को ब्लॉग पर प्रकाशित करना।

५. साहित्यकारों को मातृभाषा.कॉम से जोड़ना।

६. आलेख अभिकल्प ( ग्राफिक डिजाइन) में दक्ष होने पर संस्थान व् आंदोलन के लिए चित्र तैयार करना।

७. कम्प्यूटर सम्बंधित समस्याओं को सुलझाना।

८. हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए संगणक के माध्यम से जनमानस का समर्थन प्राप्त करना।

९. हिन्दीभाषाओं का अन्यभाषाओँ से समन्वय स्थापित करने के लिए कार्य करना।

आदरणीय वाणीपुत्र पत्रकार साथियों,
सादर वन्दे !

 

तुमने कलम उठाई है तो वर्तमान लिखना,

हो सके तो राष्ट्र का कीर्तिमान लिखना,
चापलूस तो लिख चुके हैं चालीसे बहुत,
हो सके तो तुम हृदय का तापमान लिखना
महलों में गिरवी है गरिमा जो गाँव की,
सहमीसी सड़कों पर तुम हिन्दुस्तान लिखना

 

हिन्दी को भारत में वर्तमान में राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है, जबकि हिन्दी का स्थान ‘राष्ट्रभाषा’ का है । हमने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने और हिन्दी को रोज़गार मूलक भाषा बनाने के उद्देश्य से मातृभाषा उन्नयन संस्थान व हिन्दी ग्राम का गठन किया है ।

हिन्दी ग्रामक्या हैं?
हिन्दी ग्राम शब्द में ही सम्पूर्ण परिकल्पना समाहित है, एक ग्राम जो सबसे छोटी ईकाई होकर भी समग्र को समेट कर संचालित होता है, उसी उद्देश्य को हिन्दी ग्राम में सहेजा जा रहा है।
हिन्दी ग्राम का मूल उद्देश्य हिन्दी भाषा को रोजगार मूलक व व्यवसाय से जोड़ना है, क्योंकि विश्व की कोई भी भाषा जैसे अंग्रेजी, जापानी, चाईनीज, फ्रैन्च आदि जब तक बाजार से नहीं जुड़ी तब तक उसका विकास सीमित ही रहा है । उसी तरह संस्कृत बाजार से दूर रही तो उसे विलुप्तता की कगार पर ला पहुँचाया, यही हाल हिन्दी का भी हो रहा है। परन्तु हिन्दी को बाजार मूलक बनाने और उसमें रोजगार के अवसर लाने के उद्देश्य से हिन्दी ग्राम की शुरुआत की गई है।
देशभर में हिन्दी से लोगों को जोड़ने के लिए हिन्दी में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित करना है ।

उक्त अभियान के तहत संपूर्ण राष्ट्र में हस्ताक्षर बदलो अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य है कि यदि आप अँग्रेज़ी में हस्ताक्षर करते है तो हिन्दी में हस्ताक्षर करने की शुरुआत कीजिए। हस्ताक्षर दिनचर्या की छोटी किंतु प्रभावपूर्ण इकाई है । हस्ताक्षर बदलो अभियान का लक्ष्य वर्ष २०२० तक एक करोड़ भारतीयों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाना है । इसमें शैक्षणिक संस्थान, समिति, ग्राम, नगर, प्रांत तक मातृभाषा संस्थान अपने भाषासारथी साथियों के माध्यम से पहुँचेगी ।

साथ ही देशभर में ‘हिन्दी रथ’ भी निकाला जाएगा और अन्य गतिविधियाँ भी संचालित होगी ।

 

संवाद सेतु कौन होंगे?

भारत में कार्यकरने वाले सभी पत्रकार जो हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु अपना सहयोग अपनी कलम के माध्यम से देना चाहते है वे सभी मातृभाषा उन्नयन संस्थान और भारतीय मनीषा के बीच ‘संवाद सेतु’ की भूमिका में रहेंगे।  इस अभियान में मीडिया के साथियों की भूमिका संवाद सेतु के रूप में भी रहेगी ।

संवाद सेतु का दायित्व

  1. आपकों अपने संस्थान / क्षेत्र में आंदोलन की खबरों को प्रकाशित करना है। जिससे उन खबरों के माध्यम से हिन्दी प्रेमी लोग जुड़कर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के इस महाकुंभ में अपनी आहुति दे सके |
  2. स्वयं भी व अन्य पत्रकार साथियों को समाचारों में मानक शुद्ध हिंदी लेखन की और प्रशस्त करना है, क्योंकि आपके द्वारा लिखी अशुद्ध हिन्दी अन्य जनमानस के लिए मानक बन जाया करती है।
  3. समाचार संस्थानों में अधिकाधिक हिन्दी भाषा के प्रयोग पर कार्य करना है।
  4. भारतीय जनमानस को हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु प्रेरित करना है।
  5. अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करना है।

इस अभियान में मीडिया के साथियों की भूमिका संवाद सेतु के रूप में भी रहेगी । यदि आप राष्ट्र सेवा के इस प्रकल्प का हिस्सा बनना चाहते हैं तो स्वागत है आपका । क्या आप इस प्रकल्प का हिस्सा बनकर हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहते हैं?

यदि हाँ तो निम्न पत्र भरें,
https://goo.gl/forms/51ZwM3hoSn3xX8gv1

अतिशीघ्र संस्थान के केंद्रीय कार्यालय द्वारा आपको मेल के माध्यम से व संपर्क करके संपूर्ण जानकारी दी जाएगी । अधिक जानकारी के लिए आप संस्थान का अंतरताना (वेब) भ्रमण कर सकते हैं जिसका पता है- www.hindigram.com
या दूरभाष +91-7067455455 / 9406653005
या अणुभाष (ईमेल)-hindigramweb@gmail.com
पर संपर्क कर सकते हैं ।

जय हिंद- जय हिन्दी

आपका,

डॉ. अर्पण जैनअविचल
अध्यक्ष- मातृभाषा उन्नयन संस्थान

कमलेश कुमार कमल का जन्म 1 सितम्बर 1982 को माता आशा देवी व पिता श्री लंबोदर झा जी के यहाँ हुआ। पिता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और माता धर्मपरायण घरेलु महिला। वस्तुतः साहित्य का चस्का गीतांजलि पढ़ कर लगा नहीं तो पहला प्यार गणित ही रहा है ! 12 वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय पूर्णियाँ से विज्ञान विषयों के साथ की । आगे , गणित के गुर सुपर 30 के आनंद कुमार से सीखा (तब यह रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स था।) आज भले ही लोग मुझे ‘कमल की कलम’ नाम से जानते हैं पर कभी पूर्णियाँ ,बिहार में ‘कमल्स टीचिंग सेंटर’ नाम से इंजीनियरिंग के दो संस्थानों का संचालन करता था जिनके 100 से अधिक छात्र आज देश-विदेश में कुशल अभियंता हैं । लेकिन एक बार जब साहित्य की लगन लगी तो फिर भाषा और साहित्य का ही होकर रह गया और सच कहूँ तो व्याकरण को समझने-समझाने में मुझे गणित की पृष्ठभूमि से बड़ा लाभ हुआ ।
आपके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि: 15 वर्षों के लेखकीय जीवन में मेरे लिए यह मानसिक परितोष देने वाला क्षण है जब 500 से अधिक साहित्यकर्मी और हजारों सुधी पाठक हिंदी से जुड़े किसी प्रश्न के उत्तर या संशय के शोधन के लिए मुझ पर भरोसा करते हैं ।
“कमल की कलम” की आशातीत सफलता ने जहाँ इसे प्रमाणित किया है ,वहीं मेरी जिम्मेदारी को बढ़ा भी दिया है। आप सबको प्रणाम करता हूँ और विश्वास दिलाता हूँ कि पूरी कोशिश करूँगा कि भाषा और व्याकरण की दुरूहतम चीजों को सरलतम तरीके से आपके समक्ष प्रस्तुत करूँ ।
वर्तमान में आप मातृभाषा उन्नयन संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ हिंदी ग्राम में संयोजक, साहित्य संपादक -साहित्यकार कोश, सहायक संपादक-अंतरा शब्द शक्ति ,.प्रबंध संपादक : शब्द-अभिव्यक्ति पत्रिका, कमल की कलम’ ब्लॉग के लेखक व इन सबके अतिरिक्त, संप्रति 29 वीं वाहिनी, ITBP में उप सेनानी के पद पर कार्यरत हैं ।
आप परिश्रम की पराकाष्ठा में विश्वास करते है, आपके अनुसार स्वर्गीय राजेंद्र यादव जी ने एक दुनिया समानांतर की भूमिका में लिखा है , “प्रतिभा अपने विस्फोट से नहीं ,अपने नैरन्तर्य से अपने आप को प्रमाणित करती है।” – मैं इससे सहमत हूँ ।
इसके अतिरिक्त मेरे लिए तीन दिशानिर्देशक सिद्धांत हैं:
1. ‘व्यक्ति नहीं विचारधारा’
2.‘सतत विकास’ और
3. ‘कौन सही है -महत्वपूर्ण नहीं है; महत्वपूर्ण है कि क्या सही है।’
आपकी सफलता का राज- मैं अपने आप को सफल नहीं मानता । जिस दिन हर हिंदुस्तानी की ज़ुबान पर हिंदी होगी, उस दिन मैं अपने आपको सफल मानूँगा। मुझे गर्व है कि श्री वेद प्रताप वैदिक और राज कुमार कुंभज जी सरीखे युगपुरुषों का मुझे आशीर्वाद मिल रहा है तथा डॉक्टर अर्पण जैन जैसे समर्पित हिंदीसेवी अहर्निश मेरे साथ हैं।
भविष्य के लिए योजना: ‘हस्ताक्षर बदलो अभियान’ तो बस शुरुआत है ; बदलना तो उस सोच को है जो हिंदी को अंग्रेजी से कमतर समझती है ।
संस्थान का उद्घोष है: “हिंदी के सम्मान में, हर भारतीय मैदान में।”
आपका समाज को कोई संदेश: सभी हिंदी प्रेमियों से मैं हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि माँ हिंदी अपने अतुल्य गौरव को प्राप्त करे, इसके लिए हमें भी अपना योगदान देना चाहिए ।
हमारा किसी भाषा से कोई बैर नहीं है .. खुद मेरा ही एक अंग्रेजी उपन्यास शीघ्र प्रकाश्य है । इसके अलावा संस्कृत भाषा का अल्प ज्ञान भी हिंदी शब्दों की व्युत्पत्ति को समझने-समझाने में सहायक प्रतीत होता है। लेकिन, इतना तय है कि हिंदी हम सबके जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है और इसलिए इसके प्रति हमारा दायित्व भी है । हर राष्ट्र की एक राष्ट्रभाषा होती है ,भारत की भी होनी चाहिए ।आखिर भारत देश भर नहीं ,एक राष्ट्र भी है । हिंदी हमारे हँसने, बोलने , दुःख- सुख, स्वप्न देखने की भाषा है , तो क्यों ना इसे रोजगारोन्मुख बनाया जाए ? इसका प्रयोग करने में क्यों न हम सबको गर्व की अनुभूति हो ?
जहाँ तक संस्थान के उत्तरदायित्व का प्रश्न है तो हम कोशिश करेंगे कि हिंदी से जुड़ी हर समस्या का समाधान लेकर समाज के सामने आएँ !

आदर्श हिन्दी ग्राम

भारत वह राष्ट्र हैं जहाँ हर पग पर पानी और बानी बदल जाती है फिर भी इस राष्ट्र की एकसूत्रीय भाषा हिन्दी मानी गई हैं| राष्ट्र के विश्वगुरु बनने की यात्रा का प्रथम पड़ाव भी भारत में भाषा की स्थापना ही माना जाएगा | क्योंकि एक राष्ट्र का संपूर्ण गौरव उस राष्ट्र के निवासियों में निहित भाव और संस्कृति के प्रति समर्पण से ही निर्मित होता हैं | इसी तारतम्य में भारत के प्रत्येक ग्राम को आदर्श हिन्दी ग्राम के रूप में स्थापित करने की परिकल्पना जिसे तैयार किया है डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने | उसी परिकल्पना को धरातलीय करने के उद्देश्य से इस पुस्तक का निर्माण किया गया हैं | भरत का भारत हिन्दी के अभिमान से शोभित हैं | परंतु दुर्भाग्य है इस राष्ट्र का कि स्वतंत्रता के लगभग ७ दशक बीत जाने के बाद भी राजनैतिक ज़ंजीरों के कुत्सित प्रयासों से यह राष्ट्र अपनी मातृभाषा हिन्दी को राष्ट्रभाषा नहीं बना पाया | जिस तरह इस राष्ट्र में राष्ट्रगान, राष्ट्र चिन्ह, राष्ट्र ध्वज, राष्ट्र गीत, राष्ट्रीय पशु-पक्षी सबकुछ है सिवा राष्ट्र भाषा के |

राष्ट्रभाषा की एक आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि राष्ट्र के प्रतिनिधित्व के समस्त प्रमाण राष्ट्रीय एकता तो दिखाते हैं किन्तु भाषाई एकता ही राष्ट्र की अखंडता को परिभाषित करती हैं | और साथ ही जिस तरह से राष्ट्र के प्रतिनिधित्व ध्वज, गीत, गान,पशु, पक्षी आदि के अपमान का जो दंड संवैधानिक रूप से निर्धारित है वह राष्ट्रभाषा के अपमान का भी हो | ताकि एक राष्ट्र में भाषा के कारण दूसरे राष्ट्र का जन्म ना हो सके | भारत की संस्कृति प्रशांत महासागर के समान गहरे हृदय वाली है, परंतु यहाँ हिन्दी का अपमान हो यह हिंद के निवासियों के लिए असहनीय भी हैं | साथ ही देश की सांस्कृतिक अखंडता को बचाने और संस्कृति के संरक्षण हेतु भी जनभाषा हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनना चाहिए | एक आदर्श ग्राम जो भारतीय भाषाओं में समन्वय बनाते हुए हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करता हो, जहाँ हिन्दी के महत्व को स्थापित किया जाता हो, और हर ग्रामवासी हिन्दी में हस्ताक्षर करता हो, हिन्दी में शिक्षित हो, हिन्दी साहित्य का वृहद पुस्तकालय स्थापित हो. जहाँ हिन्दी अनिवार्य शिक्षण में शामिल हो, जहाँ के सभी सूचनापटल और व्यावसायिक पटल हिन्दी में हो | वह परिकल्पना एक नए रूप में आदर्श हिन्दी ग्रामके रूप में भारत में स्थापित हो |

विश्व में प्रथम बार आदर्श हिन्दी ग्राम की परिकल्पना तैयार हुई हैं, जिसके लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान और हिन्दीग्राम द्वारा मिलकर भारत के प्रत्येक ग्राम को आदर्श हिन्दी ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास जारी है | भारत में गांव ही रीढ़ है, भारत की आज भी ७० प्रतिशत से ज्यादा जनता गांव में निवास करती है, इसलिए भारत के गांव के बारे में सबको जानना बहुत जरुरी है कि, भारत में कुल ६४० जिले है जिनमे २५० जिले तो २०११ की जनगणना के अनुसार अति पिछड़े जिले है। इसी सूची अनुसार भारत में ६ लाख, ४९ हज़ार ४ सौ ८१ गांव है, जिसमें सबसे ज्यादा गांव उत्तर प्रदेश में है, और सबसे कम गांव चंडीगढ़ में है, उत्तर प्रदेश में १ लाख ७ हज़ार ७ सौ ५३ गांव है, चंडीगढ़ में सिर्फ १३ गांव है| मातृभाषा उन्नयन संस्थान व हिन्दीग्राम मिल कर भारत के प्रत्येक ग्राम में एक हिन्दी प्रेमी की सहायता से भाषासारथी बनाकर उस ग्राम को परिकल्पना के अनुसार आदर्श हिन्दी ग्राम के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास कर रहा हैं |

भारत भाग्य विधाता के रूप में सनातनी स्थापित भारत के ग्रामवासियों को हिन्दी भाषा के प्रति जागरूक करने के लिए नव त्रिभाषा सूत्र की स्थापना करना हमारा प्राथमिक लक्ष्य हैं | क्योंकि जब तक मातृभाषा का सम्मान नहीं होगा अन्य भाषाओं को स्वीकार करने में जनमानस को बहुत कठिनाई आएगी, इसी लिए मातृभाषा के रूप में स्थानीय स्वभाषाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, फिर हिन्दी को बतौर राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकारा जाएगा, फिर वैश्विक भाषा के रूप में अँग्रेज़ी को भी महत्व देना होगा| इसी भाव के साथ भारत के गाँवों को आदर्श हिन्दी ग्राम के रूप में स्थापित किया जाएगा|

इसी परिकल्पना को साकार करने के लिए संस्थान द्वारा भाषा सारथी बनाए जा रहे हैं जिसमे आप भी जुड़ सकते हैं क्योंकि, आज हिन्दी को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने के लिए हमें जुटकर हिन्दी का प्रचार-प्रसार करना होगा, इसीलिए आपको करना होगा

  • हस्ताक्षर बदलो अभियान को अपने क्षेत्र में संचालित एवं प्रचारित करना होगा,
  • हिन्दी लेखन करने वाले साथियों को आय दिलवाने में मदद करनी होगी,
  • हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए उसे बाजार मूलक भाषा बनानी होगी,
  • हिन्दी साहित्य को आमजन तक पहुँचाना होगा,
  • हिन्दी भाषीयों की मदद करना होगी,
  • हिन्दी के प्रचार हेतु अपने क्षेत्र में हिन्दी प्रेमियों का समुच्चय बनाकर प्रतियोगिताएँ,कार्यक्रम आदि का संचालन करना होगा|

और भी बहुत सी गतिविधियाँ जो हिन्दी के लिए करनी होगी, यदि आप जुड़कर हिन्दी को आगे लाना चाहते है तो आज ही जुड़िए | भाषासारथी बनकर आप हिन्दी सेवा के महाअभियान का हिस्सा बन सकते है, देश में जल रही प्रत्येक मोमबत्तियाँ एक दिन हिन्दी के मार्ग का उजास बनने के लिए मशाल बनेगी, इतना विश्वास हैं |

भारत की लगभग ५० प्रतिशत से अधिक आबादी हिन्दी में संवाद करती हैं| भारत जब एक भाषा की वैचारिक क्रांति के समर के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में भाषा के बारे में कई भ्रम भी पनप रहे हैं | ऐसे काल में भारत की अखंडता को ख़तरा भारतीय भाषाओं के कारण न हो, इसलिए भारतीय भाषाओं में आपस में समन्वय होना चाहिए और भारत का हर ग्राम, नगर, प्रांत में हिन्दी को राष्ट्रभाषा के तौर पर स्वीकार करना होगा, इसी उद्देश्य की स्थापना के लिए ‘आदर्श हिन्दी ग्राम’ की परिकल्पना का जन्म हुआ | इसी उद्देश्य की स्थापना हेतु और भारत को पुन: विश्वगुरु बनाने की दिशा में आदर्श हिन्दी ग्राम की स्थापना करना महत्वपूर्ण हैं| आदर्श हिन्दी ग्राम की स्थापना का मूल उद्देश्य हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के साथ-साथ हिन्दी को जनमानस की संपर्क भाषा के तौर पर स्थापित करना हैं| भारतीय भाषाओं के महत्व को स्थापित करना हैं| और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी भाषा के गौरव को सम्मानित करना है | स्वभाषाओं के महत्व को बचा कर भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजना, संस्कारशाला का निर्माण करना और भारत की अखंडता को बचाए रखना हैं|

इसलिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ की कल्पना के अनुसार कुछ बिंदुओं को लेकर एक खाका तैयार किया हैं|

  1. जहाँ हिन्दी अनिवार्य हो।
  2. जहाँ सूचना पटल हिन्दी में हों।
  3. जहाँ सभी हिन्दी में हस्ताक्षर करते हों।
  4. जहाँ हिन्दी शिक्षा अनिवार्य हो।
  5. जहाँ हिंदी साहित्य के लिए अवसर हो।
  6. जहाँ सार्वजनिक हिन्दी पुस्कालय हो।
  7. जहाँ हिन्दी के विकास और विस्तार के लिए ग्राम सभाएँ आयोजित हो।
  8. जहाँ लोग स्वस्थ हों।
  9. जहाँ पूर्ण रूप से नशामुक्ति लागू हो।
  10. जहाँ स्वरोजगार के अवसर हों।
  11. जहाँ सभी बच्चों को सभी आवश्यक टीके लगे हों।
  12. जहाँ आंगनवाड़ी केंद्र, फुलवारी केंद्र हों तथा कुपोषण न हो।
  13. जहां किसी भी प्रकार का भेद-भाव, छुआछूत, ऊंच-नीच आदि न हो।
  14. जहाँ साफ सफाई और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता हो।
  15. जहाँ यातायात की सुविधा हो।
  16. जहाँ महिलाओं का सम्मान हो।
  17. जहाँ सभी के पास वोटर आई डी और आधार कार्ड हो।
  18. जहाँ हिन्दी ग्रामसभा में नियमित रूप से कोरमपूर्ती होती हो।
  19. जहाँ शत प्रतिशत शौचालय हों, ग्राम पूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्त हो।
  20. अतिक्रमण न हो।
  21. अंधविश्वास मुक्त गाँव हो।
  22. विवाद रहित गांव हो तथा छोटे-मोटे विवादों का निबटारा गांव में ही होता हो।
  23. जहाँ संचार और संवाद की समुचित व्यवस्था हो।
  24. जहाँ बालविवाह निषेध व विधवा विवाह प्रोत्साहित हो।
  25. जहाँ दहेज पर पूर्णतः प्रतिबंध हो।
  26. जहाँ सभी को रोजगार के अवसर व न्यूनतम मजदूरी प्राप्त हो।
  27. जहाँ पर शासन की समस्त जन कल्याणकारी योजनाओं के लाभ गरीब व पात्र को प्राप्त हो।
  28. जहाँ महिलाओं और लड़कियों के लिए निर्भय वातावरण हो।
  29. जहाँ स्वास्थ्य केंद्र के साथ स्वास्थ्यकर्मी भी उपलब्ध हों।
  30. जहाँ आत्मानंद वाचनालय, मुक्तिधाम, निर्मलाघाट हो।

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आदर्श हिन्दी ग्राम उसी को माना जाएगा जो कम से कम निर्धारित मापदण्डों का 80% मापदण्डों को पूरा करे।

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कैसे बनेगा आदर्श हिन्दी ग्राम?

किसी ग्राम को आदर्श हिन्दी ग्राम बनाने के लिए नेतृत्व, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, सरकारी योजनाओं के बीच तालमेल, निजी क्षेत्रों एवं स्वेक्षिक संगठनों का सहयोग आवश्यक होता है।

नेतृत्व:- नेतृत्व गुण, क्षमता, प्रतिबद्धता, और ऊर्जा को सकारात्मक प्रयासों में उपयोग में लाना।

समुदाय की भागीदारी:- जन समुदाय की भागीदारी से ग्रामीण हिन्दी विकास योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से तैयार करना, श्रमदान एवं जागरूकता बढ़ाने संबंधी कार्य करना।

सरकारी योजनाएं:- जनता की भावनाओं और स्थानीय क्षमताओं के अनुरूप समग्र विकास हासिल करने के लिए विभिन्न केंद्रों और राज्य प्रवर्तित योजनाओं के साथ तालमेल बिठाकर ग्रामीणों में स्व-विकास की भावनाओं को बढ़ावा देना।

निजी क्षेत्र और स्वेक्षिक संगठन:- निजी और स्वेक्षिक संगठनों की पहल के साथ भागीदारी जुटाना ताकि वे स्वस्फूर्त होकर हिन्दी के विकास हेतु आगे आएं।

दीर्घकालिक लक्ष्य:- योजनाओं के विविध तात्कालिक और दूरगामी परिणामों तथा उसकी निरंतरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए अधिकतम सफलता हेतु प्रयास करना।

हिन्दी ग्राम सभा

प्रत्येक गाँव में हिन्दी के प्रचार और शिक्षा के महत्व को स्थापित करने के उद्देश्य से हिन्दी ग्राम सभा का आयोजन होगा |

हिन्दी ग्राम सभा क्या है?

हिन्दी ग्राम सभा किसी एक गांव या पंचायत का चुनाव करने वाले गांवों के समूह की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों से मिलकर बनी संस्था होगी।गतिशील और प्रबुध्द ग्राम सभा पंचायती राज की सफलता के केंद्र में होती है।

किसी ग्राम की निर्वाचक नामावली में जो नाम दर्ज होते हैं उन व्यक्तियों को सामूहिक रूप से ग्राम सभा से जोड़ कर उन्हें हिन्दी हस्ताक्षर हेतु जोड़ा जाएगा साथ ही ग्राम साक्षरता को भी बल दिया जाएगा | हिन्दी ग्राम सभा की बैठक माह में एक बार होनी आवश्यक है। इस बारे में सदस्यों को सूचना बैठक से 15 दिन पूर्व सूचना पत्र से देनी होती है।

बैठक की सूचना

बैठक की सूचना डुगडुगी बजाकर, लाऊडस्पीकर से और ग्राम पंचायत कार्यालय के सूचना पट्ट पर नोटिस चिपकाकर या अन्य माध्यमों से आम जनता को दिया जाना आवश्यक  है।

बैठक की अध्यक्षता

ग्राम सभा की प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता उस ग्राम पंचायत का मुखिया और उसकी अनुपस्थिति में उप मुखिया करता है। साथ ही हिन्दी ग्राम का प्रतिनिधी जो भाषासारथी हो वह वक्ता के रुप में उपस्थित रहेंगे |

हिन्दी ग्रामसभा के विचारणीय विषय एवं कार्य

  1. गाँव में हिन्दी साक्षरता बढ़ाना|
  2. सभी ग्रामवासीयों को हिन्दी का महत्व समझाना |
  3. हिन्दी में हस्ताक्षर करना सीखाना |
  4. हिन्दी में रोजगार के अवसर दिलवाना |
  5. स्कूल-कॉलेज की व्यवस्था दुरुस्त करना व उनके बारे में सही जानकारी देना |
  6. हिन्दी ग्राम सभा का मासिक लेखा-जोखा के बारे में चर्चा करना।
  7. प्रशासनिक प्रतिवेदन पर विचार करना।
  8. प्रतियोगीताएं आयोजित करना जिससे हिन्दी का महत्व बढ़े |
  9. निगरानी समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करना।

डॉ. अर्पण जैनअविचलकी परिकल्पनाआदर्श हिन्दी ग्रामकी सार्थकता तभी है जब प्रत्येक हिन्दीभाषा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए हिन्दी भाषा का सम्मान करें| हिन्दी को राष्ट्रभाषा का मान दिलवाने के लिए प्रत्येक ग्राम नगर प्रांत को आदर्श हिन्दी ग्राम के रूप में स्थापित करें | अधिक जानकारी के लिए www.Hindigram.com भ्रमण करें या संपर्क करें -७०६७४५५४५५

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