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हिन्दी गौरव अलंकरण

हिन्दी गौरव अलंकरण

हिन्दी गौरव अलंकरण, मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित अलंकरण है। इस अलंकरण से प्रतिवर्ष दो विभूतियों को अलंकृत किया जाता है। इस अलंकरण में चयनित विभूतियों की दो श्रेणी है, एक हिन्दी साहित्य और दूसरी हिन्दी पत्रकारिता।
भारतीय हिन्दी साहित्यकार, पत्रकार व हिन्दी प्रेमियों सहित हिन्दी भाषा के लिए कार्य करने वाले लोगों को दिया जाने वाला वह सम्मान है, जो हिन्दी के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि, शिक्षा, साहित्य, प्रचार, हिन्दी भाषा सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में उनके विशिष्ट योगदान को मान्यता प्रदान करने के लिए दिया जाता है। हिन्दी गौरव अलंकरण को वर्ष 2020 से स्थापित किया गया है। हिन्दी की गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करने वाली दो विभूतियों को प्रतिवर्ष संस्थान द्वारा अलंकृत किया जाता है।
पूर्व में वर्ष 2020 में इस अलंकरण से वर्षों तक नईदुनिया के माध्यम से हिन्दी पत्रकारिता को गौरव प्रदान करने वाले पद्मश्री अभय छजलानी जी व अज्ञेय जी के चौथा सप्तक के कवि श्री राजकुमार कुम्भज जी को विभूषित किया गया, तत्पश्चात वर्ष 2021 में आदरेय श्री कैलाशचंद्र पंत जी (महामंत्री,राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, भोपाल) व देवपुत्र के संपादक आदरेय डॉ. विकास दवे जी (निदेशक, साहित्य अकादमी, म. प्र. शासन) विभूषित हुए।
ज्ञात हो कि देशभर ही नहीं अपितु वैश्विक स्तर पर हिन्दी प्रचार के लिए सतत कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान भारत में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, संस्थान देश का पहला आईएसओ प्रमाणित हिन्दी सेवी संस्थान है। वर्ष 2020 में 11 लाख लोगों के हस्ताक्षर अन्य भाषाओं से हिन्दी में परिवर्तित करवाने के लिए हस्ताक्षर बदलो अभियान संचालित करने के लिए संस्थान द्वारा विश्व कीर्तिमान दर्ज किया गया था, जिसे वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स, लंदन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया था।
इसी के साथ, वर्तमान में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के लगभग पंद्रह हज़ार हिन्दीयोद्धा सम्पूर्ण राष्ट्र में हिन्दी भाषा के प्रचार के लिए कार्यरत हैं। इस समय लगभग 20 लाख लोगों ने संस्थान के अभियान से जुड़कर अपने हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित किए हैं। देश के हज़ारों साहित्यकार, पत्रकार व हिन्दीयोद्धा संस्थान से जुड़े हैं। वैश्विक स्तर पर भी संस्थान द्वारा लगातार हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य किए जा रहे हैं।
जय हिन्दी!