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वादीज हिन्दी शिक्षा समिति

वादीज़ हिंदी शिक्षा समिति का समिति का संक्षिप्त परिचय

वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति की स्थापना मूल रूप से साल 1997 में उस समय हुई जब श्रीनगर (कश्मीर) में हिन्दी प्रेमियों और जानकारों की बहुत कमी थी| इस संस्था के कई मुख्य उद्देश्यों के साथ-साथ वादी के बच्चों को भी हिन्दी भाषा से अवगत कराना इस समिति का मुख्य उद्देश्य था|

इस संस्था को इस कार्य में बेहद कामयाबी तब मिली जब इस संस्था में बच्चों के साथ साथ शिक्षक भी जुडने लगे जो हिन्दी भाषा से अनभिज्ञ तो न थे पर हिन्दी भाषा के प्रति अपनी जानकारी को और आगे बढाना चाहते थे,जैसे व्याकरण का क्षेत्र, निबंध रचना, पत्रकारिता , शब्दावली और फिर समय के साथ साथ हिन्दी कम्प्यूटर (इन पेज) की जानकारी भी लेने लगे और फिर धीरे धीरे एक ऐसे मंच का निर्माण होने लगा जहाँ समस्त वादी के हिन्दी प्रेमी एकत्रित होने लगे , और हिन्दी के प्रति अपने लगाव और जानकारी को बढावा देने लगे|

इसी दौरान वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति द्वारा घाटी में अनेक कार्यक्रमों का संचालन होने लगा ,

1:- हिन्दी वेबसाइट में सहयोग

2:‌- हिन्दी पाठ्यक्रम में सहयोग

3:- हिन्दी अध्यापन में सहयोग

4:- नये शब्दावली पर जोर और व्याकरण की शुद्धीकरण

5:‌- हिन्दी प्रचार –प्रसार हेतु अधिकारियों एवं विद्धार्थियों को पुरस्कार

6:- हिन्दी समाज सेवकों को सम्मान

7:- हिन्दी पुस्तकों की प्रदर्शनी

8:- भारतीय संस्कृति उत्सवऔर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

9:- भारतीय पारम्परिक व्यंजनों की शिक्षा

10:- समय‌- समय पर कवि गोष्ठी का आयोजन

11:- नये शब्दावली के प्रचार प्रसार के लिये वर्कशाप का आयोजन

समय के साथ साथ हिन्दी को रोजगार की भाषा बनाना भी इस संस्था का एक मुख्य लक्ष्य था,और अभी भी हैं|

कश्मीर एक –प्राकृतिक पर्यटन स्थल होने के साथ साथ मौसम के दृष्टिकोण से भी बर्फ़ीला स्थल है,जहाँ साल के लगभग 4-5 महिने पर्यटकों के आवागमन के साथ रोज़गार बना रहता है वहीं 6-7 महिने रोज़गार की तंगी भी रहती है| कश्मीर घाटी के बाशिंदें भी रोज़गार की तलाश में बाहर राज्योँ में जाते हैं जिसके लिए उन्हें हिन्दी भाषा का ज्ञान होना बेहद जरूरी है और इसी वजह से हिन्दी भाषा को रोज़गार की भाषा बनाना इस संस्था के कई मुख्य लक्ष्यों में से एक लक्ष्य रहा|

हिन्दी को घाटी में जन मानस तक पहुँचाने के लिए एक बडे कदम की जरूरत थी, एक बडी सोच की जरूरत थी और इसी सोच ने वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति को जन्म दिया| एक अथक प्रयास के बाद जो संस्था नसरीन क्लासिक्स के नाम से जानी जाती थी अब वो वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति के नाम से जानी जाती है |

नसरीन क्लासिक्स का बडा विशाल रूप……… वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति

उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष पद्मभूषण डा0 गोपाल दास नीरज जी की प्रेरणामयी उपस्थिति में और रेडियो कश्मीर श्रीनगर के सन्युक्त त्तवाधान में मिलन 2015 के शीर्षक से 13 जून वर्ष 2015 को कश्मीर विश्वविद्धालय के प्रांगण गाँधी भवन में ज्ञान पीठ पुरस्कृत “ प्रो.रहमान राही “एवं तल्हा जहाँगीर द्वारा इस समिति का लोकार्पण किया गया, रेडियो कश्मीर के सरबरा सईद हूँमायू कैसर इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे| इस कार्यक्रम में सिर्फ हिन्दी ही नहीं हिन्दी- कश्मीरी भाषायी परिचर्चा के साथ काव्य- गोष्ठी का आयोजन किया गया और विशिष्ठ रूप से साहित्य सेवियों और प्रमियों को सम्मानित किया गया | स्कूली बच्चो द्वारा कई सांसकृतिक कार्यक्रम पेश किए गये और विशेष रूप से डा. गोपालदास जी दवारा रचित गान का मनोरंजन कार्यक्रम शौकत शफी द्वारा प्रस्तुत किया गया |

वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति के निदेशक राष्ट्रीय कवि कुमार मनोज और रेडियो कश्मीर के जाने माने उद्घोषक रशीद निज़ामी द्वारा इस काव्यगोष्ठी का संचालन हुआ

काव्य पाठ में हिंदुस्तान के दिग्गज़ कवियों प्रदीप चौबे, प्रमोद तिवारी , कुमार मनोज, शशिकांत यादव , सुरेश श्रीवास्तव ,शशांक प्रभाकर रमेश मुस्कान , डाँ कमल मुस्सदी जी ने अपने कविता पाठ से सबका मन मोह लिया| ज्ञानपीठ पुरस्कृत प्रो. रहमान राही, रफ़िक राज़, नसीमा शफाई और शफी मोहम्मद मीर जैसे महान दिग्गज़ कवियों ने कश्मीरी काव्य पाठ करके इस कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिये |

उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान से आए हुए कवियों और कश्मीर घाटी के उर्दू , कश्मीरी, पन्जाबी और हिन्दी के विशिष्ट कवियों और लेखकों के साथ साथ युवा पीढी के उभरते हुए रचनाकारों को सम्मानित करके वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति गौरंवित महसूस कर रहीं हैं |

अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति (दिल्ली) और देहली पब्लिक न्यूज से आये हुए राजेश गर्ग और प्रवीण गुप्ता जी हमारे सम्मान समारोग के विशिष्ट अथिति रहे | मिडिया पाटनर बनकर रेडियो कश्मीर श्रीनगर एवं देहली पब्लिक न्युज ने हमें कृतज्ञ किया|

वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति (श्रीनगर) और काव्य साधना समिति मेनपूरी (उ.प्र) के सन्युत तत्वाधान में 2 अगस्त 2015 को ‘’एक शाम अब्दुल कलाम आज़ाद के नाम ‘’ एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हिन्दी और उर्दू जगत के महान कवि पद्मभूषण डा0 गोपाल दास नीरज जी और राहत इंदौरी जी के साथ साथ कई विशिष्ट कवियों को सम्मानित करने का मौका मिला | वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति के निदेशक कुमार मनोज जी ने इस कार्यक्रम का संचालन करके इस समिति को ही नहीं, उस शाम के हर लम्हों में भी चार चाँद लगा दिये|

10 से 12 सितम्बर तक वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति की अध्यक्षा नसरीन अली और निदेशक कुमार मनोज जी को भोपाल 10 वें विश्व हिन्दी सम्मेलन मेँ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ . इसका मूल मकसद यहीं था कि वहाँ पर हिंदुस्तान के ही नहीं विश्व के कोने कोने से आये दिग्गज़ कवियों, हिन्दी प्रेमियों ,लेखकों रचनाकारों से मुलाकात हो से , ताकि भविष्य में कश्मीर श्रीनगर में हिन्दी के प्रचार –प्रसार में वो हमारा मार्गदर्शन कर सके|

12 सितम्बर 2015 को वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति की अध्यक्षा ‘’नसरीन अली” को ‘’ सिमरन सहित्य संस्था कानपूर ‘’ की तरफ से हिन्दीत्तर क्षेत्रों में हिन्दीके विकास, विस्तार एवं प्रचार- प्रसार के कार्य हेतु सम्मानित किया गया| वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति का मकसद, हिन्दी भाषा को सरल, सहज बनाकर जन मानस तक पहुँचाना, रोजगार की भाषा बनाना , सकारी कार्यालय की भाषा बनाना है, जिसके लिए समिति के निदेशक, अध्यक्षा ,उपध्यक्ष, सचिव , उपसचिव सभी कार्यरत हैं|