मातृभाषा उन्नयन संस्थान – हिन्दी ग्राम
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मातृभाषा उन्नयन संस्थान

मातृभाषा उन्नयन संस्थान का एकमात्र उद्देश्य यही है कि `हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा` बनाया जाए| इसके लिए हमारे द्वारा पूरे समर्पण के साथ प्रयास किए जा रहे है| भारतभर में हस्ताक्षर बदलो अभियान चलाया जा रहा है जिसमें वर्ष २०२० तक १ करोड़ भारतीयों को अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करने की प्रेरणा देते हुए शपथ दिलवाई जाएगी | इसी के सहित भारत सहित विदेशों के भी हिंदी के हर नवोदित रचनाकार को लेखन का मंच दिया जा रहा है, ताकि विश्व पटल पर हिन्दी चमके|

हिन्दी ग्राम की इकाईयों में ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान(पंजी)’, मातृभाषा.कॉम और अन्तरा शब्दशक्ति प्रकाशन, साहित्यकार कोश शामिल है |  संस्था द्वारा हस्ताक्षर बदलो अभियान का भी संचालन किया जा रहा है | फिलहाल हिन्दी के प्रति देशभर में चिन्ताएं बढ़ रही है, इसे देखकर लगता है कि हिन्दी पुन: भारत को विश्व गौरव बना सकती है |

मातृभाषा उन्नयन संस्थान तत्पर है हिन्दी विकास हेतु

मातृभाषा उन्नयन संस्थान का एकमात्र उद्देश्य यही है कि `हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा` बनाया जाए|  इसके लिए हमारे द्वारा पूरे समर्पण के साथ प्रयास किए जा रहे हैं| भारतभर में हस्ताक्षर बदलो अभियान चलाया जा रहा है जिसमें वर्ष २०२० तक १ करोड़ भारतीयों को अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करने की प्रेरणा देते हुए शपथ दिलवाई जाएगी | इसी के सहित भारत सहित विदेशों के भी हिन्दी के हर नवोदित रचनाकार को लेखन का मंच दिया जा रहा है,ताकि विश्व पटल पर हिंदी चमके|
वर्तमान में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के माध्यम से 1 लाख लोगों ने अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करने का प्रण लिया है | इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ है व महासचिव डॉ.प्रीति सुराना, उपाध्यक्ष संजय जैन (कोचर) कोषाध्यक्ष समकित सुराना, सचिव  कैलाश बिहारी सिंघल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य बृजेश शर्मा, कीर्ति वर्मा, अदिति रूसीया व पिंकी परुथी,  मृदुल जोशी संस्थान के संवाद सेतु रोहित त्रिवेदी है | मध्यप्रदेश से कमलेश कमल, जम्मू कश्मीर से प्रदेश अध्यक्ष नसरीन अली ‘निधि’ और राजस्थान से रिखबचन्द रांका ‘कल्पेश’ जुड़ें हैं |

संस्था के लक्ष्य एवं उद्देश्य 

 1. मातृभाषा हिन्दी का उन्नयन।
2. हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनाने हेतु संवैधानिक संघर्ष करना
3. हिन्दी के व्यापक विस्तार हेतु जन जागृति अभियान चलाना
4. हिन्दी के विकास के लिए साहित्यकारों, रचनाकारों की  आर्थिक सहायता करना  एवं  उक्त सभी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कोष स्थापित करना।
5. हिन्दी की बहुमूल्य एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संग्रह कर संरक्षित करना|
6. हिन्दी साहित्य को अंकरुपीत (डिजीटल) करना |
7. हिन्दी भाषा के शिक्षकों को प्रशिक्षित करना ।
8. हिन्दीतर प्रदेशों के हिंदी अध्ययन कर्ताओं की समस्याओं को दूर करना।
9. हिन्दी शिक्षण में अनुसंधान के लिए अधिक सुविधाएँ उपलब्ध करवाना।
10. उच्चतर हिन्दी भाषा, साहित्य और अन्य भारतीय भाषाओं के साथ हिन्दी का तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अध्ययन और सुविधाओं को उपलब्ध करवाना।
11. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 के दिशा-निर्देशों के अनुसार हिन्दी भाषा के अखिल भारतीय स्वरूप का विकास कराना और दिशा-निर्देशों के अनुसार हिन्दी को अखिल भारतीय भाषा के रूप में विकसित करने के लिए कार्य करना।
12. हिन्दीतर क्षेत्रों के हिन्दी अध्यापकों के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण|
13. विदेशी छात्रों के लिए द्वितीय एवं विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण ।
14. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी का प्रचार-प्रसार ।
15. सांध्यकालीन परास्नातकोत्तर अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, जनसंचार एवं  हिन्दी पत्रकारिता और अनुवाद विज्ञान प्रशिक्षण।
16. केंद्र/राज्य सरकार के तथा बैंकों आदि के अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए नवीकरण, संवर्धनात्मक, कौशलपरक कार्यक्रम और कार्यालयीन हिन्दी प्रशिक्षण।
17. भाषा प्रयोगशाला एवं दृश्य – श्रव्य उपकरणों के माध्यम से  हिन्दी के उच्चारण का सुधारात्मक अभ्यास ।
18. संगणक (कंप्यूटर) साधित हिन्दी भाषा शिक्षण ।
19. संगोष्ठी, कार्यगोष्ठी, विशेष व्याख्यान, प्रसार व्याख्यान माला आदि का आयोजन ।
20. संस्थान द्वारा प्रणीत, संपादित एवं संकलित पाठ्य सामग्री, आलेख, पाठ्य पुस्तकों आदि का प्रकाशन ।
21. विदेशी विद्यार्थियों हेतु रंगोली की सज्जा, हिन्दी भाषा, अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, तुलनात्मक साहित्य आदि से संबंधित शोधपूर्ण पुस्तक, पत्रिका का प्रकाशन ।
22. हिन्दी भाषा तथा साहित्य का अध्ययन – अध्यापन तथा अनुसंधान में सहायतार्थ समृद्ध पुस्तकालय खोलना।
23. हिन्दी के प्रोत्साहन के लिए अखिल भारतीय प्रतियोगिताएँ|
24. हिन्दी सेवियों का सम्मान ( हिन्दी भाषा के प्रचार प्रसार, शैक्षिक अनुसंधान, जनसंचार, विज्ञान आदि क्षेत्रों में कार्यरत  हिन्दी विद्वानों के लिए) ।
25. समय – समय पर भारत सरकार द्वारा सौंपी जाने वाली हिन्दी संबंधी परियोजनाएँ तथा राजभाषा विषयक अन्य कार्य।
26. भारत संघ तथा इसके विभिन्न राज्यों में संविधान के अधीन निर्मित राजभाषा हिन्दी समेत अन्य प्रादेशिक भाषाओं से संबंधित नीतियों को शिक्षा के क्षेत्र और अन्य सरकारी कामकाज में लागू कराने हेतु प्रयास करना।
27. ‘ शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम अनिवार्यतः शिशु की मातृभाषा हो ‘, इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना।
28. राजभाषा हिन्दी समेत अन्य प्रादेशिक भाषाओं को प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा का माध्यम बनाने के लिए प्रयास करना।
29. पाठ्य-पुस्तकों/अनुपूरक पाठ्य सामग्री/परिक्षा प्रश्न-पत्रों आदि के प्रकाशनों में हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं की मानक तथा अधिकृत तकनीकी शब्दावली के प्रयोग को सुनिश्चित करवाना।
30. सरकारी कामकाज और न्यायालयों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करना जिससे देश वास्तविक रूप में स्वतंत्र कहला सके।