LOADING

Type to search

मातृभाषा उनयन परिषद

मातृभाषा उन्नयन संस्थान का एकमात्र उद्देश्य यही है कि,`हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा` बनाया जाए| इसके लिए हमारे द्वारा पूरे समर्पण के साथ प्रयास किए जा रहे हैं| भारतभर में हस्ताक्षर बदलो अभियान चलाया जा रहा हैं जिसमें वर्ष २०२० तक १ करोड़ भारतीयों को अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करने की प्रेरणा देते हुए शपथ दिलवाई जाएगी | इसी के सहित भारत सहित विदेशों के भी हिंदी के हर नवोदित रचनाकार को लेखन का मंच दिया जा रहा है, ताकि विश्व पटल पर हिंदी चमके|

संस्था के लक्ष्य एवं उद्देश्य 

 1. मातृभाषा हिन्दी का उन्नयन।
2. हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनाने हेतु संवैधानिक संघर्ष करना
3. हिन्दी के व्यापक विस्तार हेतु जन जागृति अभियान चलाना
4. हिन्दी के विकास के लिए साहित्यकारों, रचनाकारों की  आर्थिक सहायता करना  एवं  उक्त सभी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कोष स्थापित करना।
5. हिन्दी की बहुमूल्य एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संग्रह कर संरक्षित करना|
6. हिन्दी साहित्य को अंकरुपीत (डिजीटल) करना |
7. हिंदी भाषा के शिक्षकों को प्रशिक्षित करना ।
8. हिंदीतर प्रदेशों के हिंदी अध्ययन कर्ताओं की समस्याओं को दूर करना।
9. हिंदी शिक्षण में अनुसंधान के लिए अधिक सुविधाएँ उपलब्ध करवाना।
10. उच्चतर हिंदी भाषा, साहित्य और अन्य भारतीय भाषाओं के साथ हिंदी का तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अध्ययन और सुविधाओं को उपलब्ध करवाना।
11. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 के दिशा-निर्देशों के अनुसार हिंदी भाषा के अखिल भारतीय स्वरूप का विकास कराना और दिशा-निर्देशों के अनुसार हिंदी को अखिल भारतीय भाषा के रूप में विकसित करने के लिए कार्य करना।
12. हिंदीतर क्षेत्रों के हिंदी अध्यापकों के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण|
13. विदेशी छात्रों के लिए द्वितीय एवं विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण ।
14.अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी का प्रचार-प्रसार ।
15.सांध्यकालीन परास्नातकोत्तर अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, जनसंचार एवं हिंदी पत्रकारिता और अनुवाद विज्ञान प्रशिक्षण।
16. केंद्र/राज्य सरकार के तथा बैंकों आदि के अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए नवीकरण, संवर्धनात्मक, कौशलपरक कार्यक्रम और कार्यालयीन हिंदी प्रशिक्षण।
17. भाषा प्रयोगशाला एवं दृश्य – श्रव्य उपकरणों के माध्यम से हिंदी के उच्चारण का सुधारात्मक अभ्यास ।
18. संगणक (कंप्यूटर) साधित हिंदी भाषा शिक्षण ।
19. संगोष्ठी, कार्यगोष्ठी, विशेष व्याख्यान, प्रसार व्याख्यान माला आदि का आयोजन ।
20. संस्थान द्वारा प्रणीत, संपादित एवं संकलित पाठ्य सामग्री, आलेख, पाठ्य पुस्तकों आदि का प्रकाशन ।
21. विदेशी विद्यार्थियों हेतु रंगोली की सज्जा, हिंदी भाषा, अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, तुलनात्मक साहित्य आदि से संबंधित शोधपूर्ण पुस्तक, पत्रिका का प्रकाशन ।
22. हिंदी भाषा तथा साहित्य का अध्ययन – अध्यापन तथा अनुसंधान में सहायतार्थ समृद्ध पुस्तकालय खोलना।
23. हिंदी के प्रोत्साहन के लिए अखिल भारतीय प्रतियोगिताएँ|
24.हिंदी सेवियों का सम्मान (हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार, शैक्षिक अनुसंधान, जनसंचार, विज्ञान आदि क्षेत्रों में कार्यरत हिंदी विद्वानों के लिए) ।
25. समय – समय पर भारत सरकार द्वारा सौंपी जाने वाली हिंदी संबंधी परियोजनाएँ तथा राजभाषा विषयक अन्य कार्य।
26. भारत संघ तथा इसके विभिन्न राज्यों में संविधान के अधीन निर्मित राजभाषा हिंदी समेत अन्य प्रादेशिक भाषाओं से संबंधित नीतियों को शिक्षा के क्षेत्र और अन्य सरकारी कामकाज में लागू कराने हेतु प्रयास करना।
27. ‘ शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम अनिवार्यतः शिशु की मातृभाषा हो ‘, इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना।
28. राजभाषा हिंदी समेत अन्य प्रादेशिक भाषाओं को प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा का माध्यम बनाने के लिए प्रयास करना।
29. पाठ्य-पुस्तकों/अनुपूरक पाठ्य सामग्री/परिक्षा प्रश्न-पत्रों आदि के प्रकाशनों में हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं की मानक तथा अधिकृत तकनीकी शब्दावली के प्रयोग को सुनिश्चित करवाना।
30. सरकारी कामकाज और न्यायालयों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करना जिससे देश वास्तविक रूप में स्वतंत्र कहला सके।