संकल्पना – हिन्दी ग्राम
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संकल्पना

हिन्दी ग्राम क्या हैं?

हिन्दी ग्राम शब्द में ही सम्पुर्ण परिकल्पना समाहित है, एक ग्राम जो सबसे छोटी ईकाई होकर भी समग्र को समेट कर संचालित होता है, उसी उद्देश्य को हिन्दी ग्राम में सहेजा जा रहा है|

हिन्दी ग्राम का मूल उद्देश्य हिन्दी भाषा को रोजगार मूलक व व्यवसाय से जोड़ना है, क्योंकि विश्व की कोई भी भाषा जैसे अंग्रेजी, जापानी, चाईनीज, फ्रैन्च आदि जब तक बाजार से नहीं जुड़ी तब तक उसका विकास सीमित ही रहा है | उसी तरह संस्कृत बाजार से दुर रही तो उसे विलुप्तता की कगार पर ला पहुँचाया, यही हाल हिन्दी का भी हो रहा है| परन्तु हिन्दी को बाजार मूलक बनाने और उसमें रोजगार के अवसर लाने के उद्देश्य से हिन्दी ग्राम की शुरुआत की गई है|

मूलत: हिन्दी ग्राम के माध्यम से विश्व स्तर पर हिन्दीभाषियों के लिए रोजगार के अवसरों को तलाशकर जानकारी उपलब्ध करवाना, हिन्दी का प्रचार करना, हिन्दी में शिक्षा ग्रहण करने के लिए लोगों को प्रेरित करना, हिन्दी शिक्षण से रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम संचालित करना, लेखन व रचनाकारों को जोड़ना, भारत में हिन्दी के प्रति प्रेम वर्धन करना, पर्यटन से राजस्व प्राप्त करने वाले राज्यों में हिन्दी का प्रसार कर वहा हिन्दी भाषी पर्यटकों की सहायता करना तथा राज्यों में पर्यटको का रुझान बढ़ाना और राज्यों की राजस्व वृद्धि करना, भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु हिन्दी का विस्तार करना, हिन्दी की भूमिका से भारतीयता के प्रति जागरुक विदेशीयों को आकर्षित करना और देशभर में हिन्दी से लोगों को जोड़ने के लिए हिन्दी में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित करना है |

हिन्दी ग्राम संस्थापक

इंदौर, मध्यप्रदेश निवासी डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने हिन्दी में उपलब्ध रोजगार के मंचों को एक स्थान पर लाकर लोगो तक पहुँचाने का जिम्मा लेते हुए नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से ‘हिन्दीग्राम.कॉम’ की नींव डाली |

डॉ. जैन का कहना है कि ‘जब तक हिन्दी को बाजार नहीं अपनाता तब तक लोगों का आकर्षण हिन्दी के प्रति कम रहेगा, जबकि भारत विश्व का दुसरा बड़ा बाजार हैं |’

हिन्दी ग्राम के संस्थापक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ अपने हिन्दी प्रेम के लिए देशभर में मशहुर हैं, वर्तमान में मातृभाषा.कॉम के संस्थापक होने के साथ-साथ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष हैं |

इनके द्वारा देशभर में हिन्दी के प्रचार के लिए हस्ताक्षर बदलो अभियान भी चलाया जा रहा हैं, जिसमें लोगों को हिन्दी में हस्ताक्षर करने की प्रेरणा देकर शपथ दिलवाई जाती हैं |

हिन्दी ग्राम की शुरुआत के पीछे डॉ जैन का कहना है कि ‘हमने मातृभाषा.कॉम में नवोदित व स्थापित रचनाकारों को मंच देकर उनका लेखन तो शुरु करवा दिया परन्तु जब तक वो लेखन आय का जरिया नहीं बन जाता तब तक लोगों में हिन्दी के प्रति जवाबदारी वाला प्रेम नहीं उमड़ रहा था, इसलिए मैनें हिन्दी ग्राम शुरु किया है, जिसकी परिकल्पना में ही हिन्दी को बाजार मूलत भाषा बनाना है, साथ ही देश या विदेश में हिन्दी जानने वाले के उपलब्ध अवसरों को खोज कर यहाँ उपलब्ध करवाना हैं | जनवरी के पहले सप्ताह तक विश्वस्तरीय जानकारीयाँ भी पटल पर हिन्दी में साझा होगी | हम हिन्दी को भारत में निर्मित उत्पादों की निर्माता कम्पनीयों के साथ मिलकर उत्पादों के लेबल तक लाएंगे, हिन्दी से साथ हिन्दुस्तान का परचम विश्व में फैलाएंगे|’

हिन्दी ग्राम की कार्य योजना

  1. हिन्दी के रचनाकारों को मंच उपलब्ध करवाना जहाँ वे अपनी लेखनी सहज रुप से प्रकाशित कर सकें |
  2. हिन्दी को रोजगार मूलक बनाने की ओर कार्य करना तथा उपलब्ध रोजगार आदि अवसरों को हिन्दीभाषियों तक पहुँचाना |
  3. हिन्दी भाषा में शिक्षा के महत्व को बढ़ाना |
  4. हिन्दी सिखाने के लिए स्कूल-कॉलेजों में कार्यशाला लगाना |
  5. हिन्दी शिक्षण ग्रहण करने के लिए प्रेरणा देना |
  6. हिन्दी चलचित्रों (फिल्मों) के शीर्षकों को हिन्दी में ही लिखने के लिए निदेशकों को प्रेरित करना |
  7. हिन्दी के उपलब्ध रोजगार जानकारीयों को साझा करना |
  8. हिन्दी शिक्षा के लिए मिलने वाली छात्रवृत्तियों की जानकारी साझा करना |
  9. हिन्दी में शोध करने के लिए शोधार्थीयों को सहायता करना |
  10. गैर हिन्दी राज्यों में हिन्दी भाषी लोगों की हिन्दी में मदद करना और हिन्दीभाषी लोगों को आपस में जोड़ना |
  11. हिन्दी लेखकों की पुस्तकों का निशुल्क प्रचार करना ताकि पुस्तक बिक्री से यदि आय होगी तभी रचनाकार बेहतर लिखेगा |
  12. हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकारों की कृतियाँ इंटरनेट पर सहेजना |
  13. हिन्दी समाचार संस्थानों में हिन्दी संरक्षण अभियान चलाकर हिन्दी की परिपक्वता लाना |
  14. हिन्दी को जनसामान्य की भाषा बनाकर हिन्दी के प्रति जिम्मेदारीयाँ तय करना |
  15. शासकीय कार्यालयों की व्यवहारीक भाषा हिन्दी करवाना

आंदोलन की भूमिका
देश के लगभग १० से अधिक राज्यों में बहुतायत में हिन्दीभाषी लोग रहते हैं, अनुमानित रुप से भारत में ४० फीसदी से ज़्यादा लोग हिन्दी भाषा बोलते है| किन्तु दुर्भाग्य है क़ि हिन्दी को जो स्थान शासकीय तंत्र से भारत में मिलना चाहिए वो कृपापूर्वक दी जा रही खैरात है बल्कि हिन्दी का स्थान राष्ट्रभाषा का होना चाहिए न क़ि राजभाषा का | हिन्दी को राजभाषा का सम्मान कृपापूर्वक दिया गया, बल्कि उसका अधिकार राष्ट्रभाषा का है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा बताये गये निम्नलिखित लक्षणों पर दृष्टि डाल लेना ही पर्याप्त रहेगा, जो उन्होंने एक ‘राजभाषा’ के लिए बताये थे-
(1) अमलदारों के लिए वह भाषा सरल होनी चाहिए।
(2) उस भाषा के द्वारा भारतवर्ष का आपसी धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवहार हो सकना चाहिए।
(3) यह जरूरी है कि भारतवर्ष के बहुत से लोग उस भाषा को बोलते हों।
(4) राष्ट्र के लिए वह भाषा आसान होनी चाहिए।
(5) उस भाषा का विचार करते समय किसी क्षणिक या अल्पस्थायी स्थिति पर जोर नहीं देना चाहिए।
इन लक्षणों पर हिन्दीभाषा खरी तो उतरी किंतु राष्ट्रभाषा होना हिन्दी के लिए गौरव का विषय होगा|

अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा
संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।
खंड (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ से पंद्रहवर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए उसका ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था, परन्तु राष्ट्रपति उक्त अवधि के दौरान, आदेश द्वारा, संघ के शासकीय प्रयोजनों में से किसी के लिए अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त हिंदी भाषा का और भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय रूप के अतिरिक्त देवनागरी रूप का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा।
इस अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी, संसद् उक्त पन्द्रह वर्ष की अवधि के पश्चात्, विधि द्वारा
(क) अंग्रेजी भाषा का, या
(ख) अंकों के देवनागरी रूप का,
ऐसे प्रयोजनों के लिए प्रयोग उपबंधित कर सकेगी जो ऐसी विधि में विनिर्दिष्ट किए जाएं।

अनुच्छेद 351 हिंदी भाषा के विकास के लिए निदेश
संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे जिससे वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना हिंदुस्थानी में और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्यभाषाओं में प्रयुक्त रूप, शैली और पदों को आत्मसात करते हुए और जहां आवश्यक या वांछनीय हो वहां उसके शब्द-भंडार के लिए मुख्यतः संस्कृत से और गौणतः अन्यभाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे।
हिन्दी के सम्मान की संवैधानिक लड़ाई देशभर में विगत ५ दशक से ज़्यादा समय से जारी है, हर भाषा प्रेमी अपने-अपने स्तर पर भाषा के सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है | मातृभाषा.कॉम भी अपने स्तर पर सबसे पहले भाषा के सारथीयों की एक मंच पर लाकर संगठित कर सशक्त होने साथ-साथ संघर्ष करते हुए हिन्दी के गौरव की स्थापना के लिए कार्यरत है |

आंदोलन का मूल उद्देश्य:
१. हिन्दी राष्ट्र भाषा बनें|
२. देशभर में हिन्दी के रचनाकारों को मंच मिले तथा उनके सृजन को सहेज कर पीडियों तक संरक्षित किया जा सके|
३. हिन्दी भाषी राज्यों में सबसे पहले हिन्दी के प्रति जागरूकता और जवाबदेही निर्धारित हो |
४. हिन्दी भाषी राज्यों में ज़्यादा से ज़्यादा व्यवहार हिन्दी में हो |
५. देश के समस्त राज्यों में हिन्दी के विस्तार और प्रचार हेतु प्रयत्न हो|

आंदोलन की कार्ययोजना:
1. विद्धयालय-महाविद्धयालयों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु गौष्टी, विचारमंच और कार्यशाला आदि का आयोजन करना|
2. हिन्दी में हस्ताक्षर हेतु लोगों को जागरूक करना |
3. हिन्दी भाषी राज्यों में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अँग्रेज़ी भाषा में लगे सूचना पटल( साइन बोर्ड) को हिन्दी में परिवर्तित करने हेतु जागरूक करना |
4. हिन्दी भाषी राज्यों में शासकीय कार्यालयों में सूचना पटल हिन्दी में भी हो इस हेतु प्रयास करना|
5. स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में हिन्दी भाषा में घट रही प्रवेश संख्या के प्रति लोगो में जागरूकता लाना |
6. शासकीय कार्यालयों में हिन्दी कार्यशाला लगाना |