पृष्ठभूमि – हिन्दी ग्राम
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पृष्ठभूमि

विश्व की कोई भी भाषा जैसे अंग्रेजी, जापानी, चाईनीज, फ्रैन्च आदि जब तक बाजार से नहीं जुड़ी तब तक उसका विकास सीमित ही रहा है | उसी तरह संस्कृत बाजार से दुर रही तो उसे विलुप्तता की कगार पर ला पहुँचाया | यही हाल हिन्दी का भी रहा | परन्तु हिन्दी को बाजार मूलक बनाने और उसमें रोजगार के अवसर लाने के उद्देश्य से हिन्दी ग्राम की शुरुआत हुई है|

इंदौर, मध्यप्रदेश निवासी डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ व वारासिवनी निवासी डॉ. प्रीति सुराना ने हिन्दी में उपलब्ध रोजगार के मंचों को एक स्थान पर लाकर लोगो तक पहुँचाने का जिम्मा लेते हुए नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से ‘हिन्दीग्राम.कॉम’ की नींव डाली |

डॉ. जैन का कहना है कि ‘जब तक हिन्दी को बाजार नहीं अपनाता लोगों का आकर्षण हिन्दी के प्रति कम रहेगा, जबकि भारत विश्व का दुसरे बड़े बाजार में शामिल हैं |’ डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ अपने हिन्दी प्रेम के लिए प्रसिद्ध भी हैं, वर्तमान में मातृभाषा.कॉम के संस्थापक होने के साथ-साथ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं | इनके द्वारा देशभर में हिन्दी के प्रचार के लिए हस्ताक्षर बदलो अभियान भी चलाया जा रहा हैं, जिसमें लोगों को हिन्दी में हस्ताक्षर करने की प्रेरणा देकर शपथ दिलवाई जाती है |

हिन्दी ग्राम की सह संस्थापिका डॉ प्रीति सुराना का कहना है कि ‘हमने मातृभाषा.कॉम में नवोदित व स्थापित रचनाकारों को मंच देकर उनका लेखन तो शुरु करवा दिया परन्तु जब तक वो लेखन आय का जरिया नहीं बन जाता तब तक लोगों में हिन्दी के प्रति जवाबदारी वाला प्रेम नहीं उमड़ रहा था, इसलिए हिन्दी ग्राम शुरु किया है, जिसकी परिकल्पना में ही हिन्दी को बाजार की भाषा बनाना है, साथ ही देश या विदेश में हिन्दी जानने वाले के उपलब्ध अवसरों को खोज कर यहाँ उपलब्ध करवाना हैं | विश्वस्तरीय  जानकारीयाँ भी पटल पर हिन्दी में साझा होगी | हम हिन्दी को भारत में निर्मित उत्पादों की निर्माता कम्पनीयों के साथ मिलकर उत्पादों के लेबल तक लाएंगे, हिन्दी से साथ हिन्दुस्तान का परचम विश्व में फैलाएंगे |’ हिन्दी ग्राम की इकाइयाँ ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान(पंजी)’, मातृभाषा.कॉम और अन्तरा शब्दशक्ति प्रकाशन भी है | संस्था द्वारा हस्ताक्षर बदलो अभियान का भी संचालन किया जा रहा है | फिलहाल हिन्दी के प्रति देशभर में चिन्ताएं बढ़ रही है, इसे देखकर लगता है कि हिन्दी पुन: भारत को विश्व गौरव बना सकती हैं |

हिन्दी ग्राम की कार्य योजना

  1. हिन्दी के रचनाकारों को मंच उपलब्ध करवाना जहाँ वे अपनी लेखनी सहज रुप से प्रकाशित कर सकें |
  2. हिन्दी को रोजगार मूलक बनाने की ओर कार्य करना तथा उपलब्ध रोजगार आदि अवसरों को हिन्दीभाषियों तक पहुँचाना |
  3. हिन्दी भाषा में शिक्षा के महत्व को बढ़ाना |
  4. हिन्दी सिखाने के लिए स्कूल-कॉलेजों में कार्यशाला लगाना |
  5. हिन्दी शिक्षण ग्रहण करने के लिए प्रेरणा देना |
  6. हिन्दी चलचित्रों (फिल्मों) के शीर्षकों को हिन्दी में ही लिखने के लिए निदेशकों को प्रेरित करना |
  7. हिन्दी के उपलब्ध रोजगार जानकारीयों को साझा करना |
  8. हिन्दी शिक्षा के लिए मिलने वाली छात्रवृत्तियों की जानकारी साझा करना |
  9. हिन्दी में शोध करने के लिए शोधार्थीयों को सहायता करना |
  10. गैर हिन्दी राज्यों में हिन्दी भाषी लोगों की हिन्दी में मदद करना और हिन्दीभाषी लोगों को आपस में जोड़ना |
  11. हिन्दी लेखकों की पुस्तकों का निशुल्क प्रचार करना ताकि पुस्तक बिक्री से यदि आय होगी तभी रचनाकार बेहतर लिखेगा |
  12. हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकारों की कृतियाँ इंटरनेट पर सहेजना |
  13. हिन्दी समाचार संस्थानों में हिन्दी संरक्षण अभियान चलाकर हिन्दी की परिपक्वता लाना |
  14. हिन्दी को जनसामान्य की भाषा बनाकर हिन्दी के प्रति जिम्मेदारीयाँ तय करना |
  15. शासकीय कार्यालयों की व्यवहारीक भाषा हिन्दी करवाना